चेना रिवरफ्रंट परियोजना पर एनजीटी सख्त, मीरा-भाईंदर मनपा और राज्य सरकार को नोटिस
Chena Riverfront Project News: मीरा-भाईंदर की महत्वाकांक्षी चेना रिवरफ्रंट परियोजना कानूनी और पर्यावरणीय विवादों में फंस गई है। एनजीटी ने राज्य सरकार और मनपा को नोटिस जारी किया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
चेना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
NGT Notice On Chena Riverfront Project: मीरा-भाईंदर मनपा की महत्वाकांक्षी चेना रिवरफ्रंट परियोजना अब कानूनी और पर्यावरणीय विवादों में घिर गई है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ ने परियोजना पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए राज्य सरकार, मीरा भाईंदर मनपा और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
6 हफ्तों के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश
सभी पक्षों को 6 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। पर्यावरण संगठन वनशक्ति द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चेना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खुदाई, नदी तल में बदलाव, वृक्षों की कटाई और नदी किनारे की वनस्पतियों की मशीनों से सफाई जैसे कार्य पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन हैं।
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याचिका के अनुसार, परियोजना के तहत नदी किनारे फुटपाथ, व्यावसायिक इमारतें, पर्यटन सुविधाएं और सड़कें विकसित की जा रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि यह परियोजना पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) अधिसूचना, महाराष्ट्र राज्य जल नीति-2019 और अन्य पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ है।
खास बात यह है कि चेना नदी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से प्राकृतिक रूप से बहने वाली एकमात्र नदी मानी जाती है और परियोजना क्षेत्र उद्यान के बफर जोन में आता है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में इस परियोजना को अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मैग्रोव, घास के मैदान और नदी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
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याचिका में उठाया गया पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा
- एनजीटी की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ। सुजीत कुमार बाजपेयी ने अपने 24 अप्रैल के आदेश में माना कि याचिका में पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मुद्दा उठाया गया है।
- हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि परियोजना से जुड़े कई अहम दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध है, जिनका परीक्षण आवश्यक है।
- इससे पहले भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने घोडबंदर रोड के पास नदी किनारे कथित रूप से कूड़ा फेकने, खुदाई और कंक्रीट तटबंध बनाने के मामलों को एनजीटी के सामने उठाया था।
- आरोप है कि ये गतिविधियां 2016 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी मानकों का उल्लंघन करती है। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 29 जून 2026 को निर्धारित की है।
