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मैंग्रोव बचाओ या दिखावा? निरीक्षण में नदारद समिति, शिकायतों पर उठे गंभीर सवाल

Mangrove Protectio: मीरा-भाईंदर में मैंग्रोव संरक्षण के लिए गठित संयुक्त निगरानी समिति पर लापरवाही के आरोप लगे हैं, क्योंकि हालिया निरीक्षण के दौरान अधिकांश सदस्य अनुपस्थित रहे।

  • Written By: आंचल लोखंडे
Updated On: Mar 21, 2026 | 07:57 PM

Mangrove Monitoring Committee (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Mira Bhayandar: मीरा-भाईंदर शहर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मैंग्रोव वनों की सुरक्षा के लिए गठित ‘मैंग्रोव वन संरक्षण एवं संवर्धन संयुक्त निगरानी समिति’ अब खुद ही सवालों के घेरे में है। आरोप है कि समिति न केवल शिकायतों को नजरअंदाज कर रही है, बल्कि स्थल निरीक्षण के दौरान भी अधिकांश सदस्य अनुपस्थित रहते हैं।

सरकार के आदेशानुसार गठित इस समिति का उद्देश्य शहर के मैंग्रोव क्षेत्रों की नियमित निगरानी करना और प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करना है। समिति में महानगरपालिका, वन विभाग, पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सामान्यतः हर तीन महीने में निरीक्षण दौरा किया जाना तय है।

पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में

हालिया घटनाक्रम ने इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 और 9 मार्च को शिकायतकर्ताओं को निरीक्षण के लिए सूचना भेजी गई थी, लेकिन मौके पर केवल 2 से 3 अधिकारी ही उपस्थित पाए गए। अधिकांश सदस्यों की अनुपस्थिति ने पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है।

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इस लापरवाही पर पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित सुवर्णा ने कड़ा विरोध जताते हुए उच्च तहसीलदार को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह के अधूरे निरीक्षण से मैंग्रोव संरक्षण का उद्देश्य ही विफल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर तहसीलदार नीलेश गावंडे ने हस्तक्षेप करते हुए 23 मार्च को पुनः निरीक्षण का आदेश दिया है। ,अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार समिति पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना दायित्व निभाती है या नहीं।

जवाबदेही पर बड़ा सवाल

पूर्व पार्षद रोहित सुवर्णा ने कहा कि मैंग्रोव जैसे संवेदनशील और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बनाई गई समिति की निष्क्रियता यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होती जा रही है। मैंग्रोव वनों का संरक्षण केवल सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि ईमानदार क्रियान्वयन से ही संभव है। यदि जिम्मेदार अधिकारी ही अपने कर्तव्यों से अनुपस्थित रहें, तो पर्यावरण सुरक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

Mira bhayandar mangrove protection committee inspection absence controversy

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Published On: Mar 21, 2026 | 07:57 PM

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