ISI Spy Network India (सोर्सः सोशल मीडिया)
ISI Spy Network India: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक खतरनाक जासूसी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रहा था। शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस सनसनीखेज मामले में अब तक गिरफ्तार संदिग्धों की कुल संख्या 15 हो गई है।
पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह मुंबई, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 के दौरान सिलसिलेवार बम विस्फोट करने की योजना बना रहा था। आरोपी सुहैल मलिक उर्फ रोमियो ने पूछताछ में कबूल किया कि दिल्ली के बाद जालंधर अगला निशाना था, लेकिन स्लीपर सेल के पकड़े जाने से बड़ी साजिश नाकाम हो गई।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब मार्च की शुरुआत में कौशांबी थाना क्षेत्र में तैनात एक बीट पुलिस अधिकारी गश्त के दौरान एक बाइक मैकेनिक की दुकान पर पहुंचा। वहां मौजूद एक युवक ने बताया कि उसका साथी संवेदनशील स्थानों के फोटो और वीडियो बनाकर पैसे कमाता है। इस जानकारी पर संदेह होने पर बीपीओ ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के संवेदनशील स्थानों पर सोलर-पावर्ड और सिम-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। सोनीपत रेलवे स्टेशन और दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन से ऐसे उपकरण बरामद किए गए हैं। आरोपी इन कैमरों के जरिए सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान भेज रहे थे।
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इस आतंकी गिरोह ने मुंबई के जरिए पूरे देश को दहलाने की साजिश रची थी। गिरोह ने केवल सैन्य प्रतिष्ठानों ही नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के आवासों की लोकेशन और वीडियो भी पाकिस्तान भेजे थे। नवी मुंबई में ट्रक चालक दुर्गेश निषाद ने मुंबई पोर्ट की रेकी कर वीडियो सीमा पार भेजे। सुरक्षा एजेंसियां इस साजिश को 26/11 जैसे समुद्री हमले की संभावित योजना के नजरिए से भी देख रही हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में 5 नाबालिग शामिल हैं, जिनकी उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच है। इनमें एक नौवीं कक्षा का छात्र भी है। ये युवक पाकिस्तानी नंबरों के अलावा मलेशियाई और ब्रिटिश वर्चुअल नंबरों के जरिए अपने हैंडलरों से संपर्क में थे और यूपीआई के माध्यम से भुगतान प्राप्त करते थे। फिलहाल एनआईए और रॉ (RAW) समेत कई केंद्रीय एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।