ठाणे मनपा व कल्याण डोंबिवली मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
KDMC Mayor Reservation Lottery: महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम चुनावों के परिणामों के बाद अब सबकी नजरें ‘मेयर’ की कुर्सी पर टिकी हैं। गुरुवार को मंत्रालय में हुई आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया के साथ ही यह सस्पेंस खत्म हो गया कि किस शहर का नेतृत्व किस वर्ग के हाथ में होगा। इसमें कल्याण-डोंबिवली के लिए बड़ा फैसला आया है।
महाराष्ट्र के शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को राज्य की 29 प्रमुख महानगरपालिकाओं के महापौर पद के लिए बहुप्रतीक्षित आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया चल रही है। मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित पुणे, ठाणे और नागपुर जैसी बड़ी नगरपालिकाओं के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस प्रक्रिया के जरिए यह तय किया गया कि अगले कार्यकाल के लिए कौन सा शहर महिला, ओबीसी (OBC), अनुसूचित जाति (SC), या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित होगा।
शहरी विकास विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में रोटेशन पद्धति के आधार पर पारदर्शी तरीके से पर्चियां निकाली गईं। इस प्रक्रिया का सीधा असर आगामी सात दिनों में होने वाले मेयर चुनावों पर पड़ेगा।
इस लॉटरी प्रक्रिया में सबसे पहले अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षण तय किया गया। जब कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) के नाम की चिट्ठी निकली, तो यह स्पष्ट हो गया कि इस बार शहर का प्रथम नागरिक अनुसूचित जनजाति वर्ग से होगा। KDMC के राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के बाद नई हलचल शुरू हो गई है, क्योंकि अब राजनीतिक दलों को इस विशेष वर्ग से अपने सबसे मजबूत चेहरे को आगे लाना होगा।
नियमों के मुताबिक, महाराष्ट्र में महापौर का पद रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है। पिछली बार जिन शहरों में सामान्य वर्ग का मेयर था, वहां इस बार आरक्षित वर्ग की संभावना अधिक थी। इसके साथ ही, 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के नियम ने कई दिग्गजों के गणित बिगाड़ दिए हैं। BMC जैसी बड़ी महानगरपालिका में मेयर का पद किस श्रेणी में जाएगा, इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों में गुणा-भाग शुरू हो गया है।