KDMC में बना नया इतिहास, शिवसेना-BJP गठबंधन का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या पैसे का समझौता?
KDMC Municipal Election: KDMC चुनाव में शिवसेना-BJP गठबंधन ने 20 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित कर इतिहास रच दिया है, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को पैसों का समझौता बता रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
KDMC Municipal Election: KDMC चुनाव में शिवसेना-BJP गठबंधन (सोर्सः सोशल मीडिया)
KDMC Election Controversy: कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (KDMC) चुनाव में शिवसेना-BJP गठबंधन ने एक ऐतिहासिक रणनीति अपनाते हुए एक बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड बना लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की संयुक्त रणनीति के चलते मतदान से पहले ही गठबंधन के 20 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शहर में जमकर चर्चाएं तेज हैं और विपक्ष इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहने के बजाय ‘पैसों का समझौता’ करार दे रहा है।
अब इन वार्डों में नागरिकों को मतदान का अधिकार ही नहीं मिल पाएगा। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव लड़ने में भारी खर्च आने की आशंका के चलते कई उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया, जिससे यह पूरा घटनाक्रम पैसे के लेन-देन से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
20 उम्मीदवार बिना विरोध हुए निर्वाचित
बुधवार को भी इसी रणनीति के तहत गठबंधन के 9 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। शुक्रवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि थी। दोपहर एक बजे के बाद पहले भाजपा और फिर शिवसेना के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की खबरें सामने आईं। इस तरह शुक्रवार को 11 और उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिससे कुल संख्या 20 हो गई। KDMC चुनाव के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
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निर्विरोध निर्वाचित हुए उम्मीदवारों में कल्याण पूर्व, डोंबिवली पूर्व और डोंबिवली पश्चिम के पैनल शामिल हैं। हालांकि, कल्याण पश्चिम क्षेत्र से कोई भी उम्मीदवार निर्विरोध नहीं चुना गया। इन घटनाक्रमों से KDMC में शिवसेना-BJP गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे अन्य वार्डों में गठबंधन कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा है।
पूरी तरह से पैसों का खेल: अविनाश जाधव
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जैसे विपक्षी दलों के उम्मीदवार, जो अब तक गठबंधन की तीखी आलोचना कर रहे थे, अंततः वे भी रणनीतिक दबाव में पीछे हट गए। मनसे नेता अविनाश जाधव ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “निर्विरोध निर्वाचन पूरी तरह से पैसों का खेल है। यदि यही करना था तो पार्टियों को बिना चुनाव के आपस में ही सीटों का बंटवारा पहले ही कर लेना चाहिए था।”
(इनपुट- अशोक वर्मा)
