अवैध रूप से रहने वाले 8 बांग्लादेशियों को 9 महीनों की जेल, कल्याण कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला
Illegal Bangladeshis: कल्याण अदालत ने अवैध रूप से ठाणे जिले में रहने के मामले में 8 बांग्लादेशी नागरिकों को 9 महीने सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 1,000 जुर्माना भी लगाया।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (AI Generated)
Bangladeshi Citizens Convicted For Illegal Stay In Thane: कल्याण की एक अदालत ने ठाणे जिले के विभिन्न हिस्सों से पकड़े गए 8 बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में रहने के जुर्म में दोषी ठहराया है। अदालत ने पांच दिसंबर को फैसला सुनाते हुए उन्हें नौ महीने के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा दी है।
कल्याण की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस जी इनामदार ने इन सभी आठ लोगों को आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम तथा विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दोषी ठहराया। दोषियों को अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किया गया था। 5 दिसंबर को चार मामलों में पारित फैसले में अदालत ने कहा कि चूंकि आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, इसलिए वे कानून के अनुसार दंड के पात्र हैं। हालांकि, अदालत ने कहा कि उनकी परिस्थितियों को देखते हुए दंड देते समय “मानवीय दृष्टिकोण” अपनाना आवश्यक है।
अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि अभियुक्त गरीबी, अज्ञानता और निरक्षरता के कारण अदालत के समक्ष यह भी प्रस्तुत नहीं कर सके कि वे बिना किसी दस्तावेज़ के भारतीय क्षेत्र में कैसे प्रवेश कर पाए। जिन अपराधों के लिए इन अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है, उनके लिए अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है।
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ये हैं सजा पाने वाले 8 दोषी
इन 8 दोषियों को ठाणे जिले के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में चार महिलाएं मोइना गाजी उर्फ मोइना मस्जिद सरदार (37), अमीना जहांगीर गाजी (22), शहनाज मोहम्मद अली सरदार (44) और नरगिस मोहम्मद सरदार (32) शामिल हैं। इन चारों को डोंबिवली से गिरफ्तार किया गया था। माजिदा रसूल शेख (35) नाम की महिला को कल्याण से गिरफ्तार किया गया।
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इसके अतिरिक्त, पेंटर का काम करने वाले मोहम्मद शांतो यूनुस मुल्ला (30) और ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली उनकी पत्नी सुमी मोहम्मद शांतो मुल्ला (28) को भी कल्याण से गिरफ्तार किया गया था। नूर मोनू पठान नामक मजदूर को उल्हासनगर से गिरफ्तार किया गया।
सजा पूरी होने पर होगा निर्वासित
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि सजा पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया है कि जेल अधीक्षक, जांच अधिकारी के साथ समन्वय करके, सजा पूरी होने के बाद आरोपियों को निर्वासित (deport) करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। यह भी बताया गया कि फरार आरोपी तौकीर मोहम्मद गुलामुद्दीन आलम के खिलाफ मामला अब भी लंबित है।
