ठाणे रिंग मेट्रो: विरोध के बीच पर्यावरण मंजूरी के लिए केंद्र के पास पहुंची 12,220 करोड़ की परियोजना की फाइल
Thane Ring Metro Project: विरोध के बीच ठाणे इंटीग्रेटेड रिंग मेट्रो परियोजना को बड़ा कदम मिला है। MCZMA ने CRZ क्षेत्र के हिस्से के लिए पर्यावरण मंजूरी हेतु पर्यावरण मंत्रालय को सिफारिश भेज दी है।
- Written By: अंकिता पटेल
ठाणे रिंग मेट्रो, टीआईआरएम परियोजना (सोर्स सोशल मीडिया)
Thane Integrated Ring Metro: पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की तरफ से ठाणे इंटीग्रेटेड रिंग मेट्रो (टीआईआरएम) परियोजना की हो रही खिलाफत के बीच महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (एमसीजेडएमए) ने इस परियोजना को पर्यावरण मंजूरी के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास सिफारिश भेज दी है।
यह मंजूरी 22 स्टेशनों और 29 किमी लंबे इस पूरे लूप के उस 3.65 किमी हिस्से के लिए आवश्यक है, जो तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के अंतर्गत आता है। ठाणे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार एवं नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर ठाणे रिंग मेट्रो परियोजना तैयार की गयी है। लगभग 12 हजार 220 करोड़ के सुधारित प्रारूप को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना पर प्रत्यक्ष काम भी शुरू हो गया है।
परियोजना का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू
परियोजना का काम शुरू होते हुए पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है। यह मामला पिछले दिनों विधानमंडल के मानसून सत्र में भी उठा था।
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शहरी परिवहन विशेषज्ञों ने परियोजना की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया है और चेतावनी दी है कि यदि यह अपने वर्तमान स्वरूप में आगे बढ़ती है तो इसके गंभीर पर्यावरणीय, वित्तीय और सामाजिक परिणाम होंगे।
इन सबके बीच इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर एमसीजेडएमए की यह सिफारिश एक बड़ा कदम है। महाराष्ट्र कोस्टल जोन
मैनेजमेंट अथॉरिटी की 199वीं बैठक में महामेट्रो के अधिकारियों और कंसल्टेंट्स ने परियोजना को पेश किया।
इस दौरान एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट रिपोर्ट, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट द्वारा किए गए सीआरजेड सर्वे, अल्टरनेटिव रूट स्टडी और मैंग्रोव पर असर का डिटेल्ड रिव्यू किया गया। 29.1 किमी रिंग मेट्रो में से सिर्फ 3.65 किमी रूट सीआरजेड एरिया से होकर गुजरता है। क्योंकि यह हिस्सा मैंग्रोव और खाड़ी एरिया में है। इसलिए सीआरजेड नोटिफिकेशन, 2019 के तहत अलग से एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की ज़रूरत है।
एलिवेटेड वायडक्ट, डिपो के काम में प्रशासकीय तेजी
बताया गया कि एलिवेटेड वायडक्ट व मेट्रो डिपो के डिटेल्ड डिजाइन के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके हैं और छह स्टेशनों के कंस्ट्रक्शन के लिए टेक्निकल टेंडर भी खोले जा चुके है। प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए निप्पॉन कोइ एईकॉम के साथ एक जनरल कंसल्टेंसी एग्रीमेंट साइन किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अंतिम मंजूरी, मुंबई उच्च न्यायालय से परमिशन और दूसरी एनओसी मिलने के बाद, सीआरजेड एरिया में प्रत्यक्ष काम शुरू हो जाएगा।
एमसीजेडएमए ने मेट्रो परियोजना के लिए लगाईं 20 शर्तें
ठाणे इंटीग्रेटेड रिंग मेट्रो परियोजना की सिफारिश करते हुए, एमसी जेडएमए ने 20 शर्ते लगाई हैं। इनमें प्रभावित क्षेत्र में मैग्रोव के पेड़ों का तीन गुना रोपण, मुंबई उच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति प्राप्त करना, वन विभाग से नो-ऑब्जेक्शन, ट्री अथॉरिटी से अप्रूवल, एक इंडिपेंडेंट एनवायरनमेंट सेल बनाना, थर्ड पार्टी एनवायरनमैटल ऑडिट, सीआरजेड में मलबा डालने पर बैन, कंस्ट्रक्शन के दौरान इको-कंक्रीट और पॉल्यूशन कंट्रोल के तरीकों का इस्तेमाल शामिल है।
यह परियोजना 29.1 किमी लंबी है, जिसमें 22 स्टेशन (20) एलिवेटेड और 2 भूमिगत) शामिल है। यह रिंग मेट्रो ठाणे जंक्शन से शुरू होकर वागले एस्टेट, मानपाड़ा, वाघबिल, बालकुम और राबोडी से होते हुए वापस ठाणे रेलवे स्टेशन तक एक पूरा लूप बनाएगी। यह परियोजना ठाणे को मुंबई मेट्रो की अन्य लाइनों (जैसे लाइन 4 और 5) से निर्वाध रूप से जोड़ने में मदद करेगी।
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स्टेशन के नाम
रायला देवी, वागले सर्कल, लोकमान्य नगर बस डिपो, शिवाजी नगर, नीलकंठ टर्मिनल, गांधी नगर, डॉ. काशीनाथ घाणेकर नाट्यगृह, मानपाड़ा, डोंगरीपाड़ा, विजयनगरी, वावबिल, वाटरफ्रंट, पातलीपाड़ा, आजाद नगर बस स्टॉप, मनोरमा नगर, कोलशेत औद्योगिक क्षेत्र, बालकुम नाका, बालकुमपाड़ा, राबोडी, शिवाजी चौक, ठाणे जंक्शन (भूमिगत) और न्यू ठाणे (भूमिगत)।
