35 साल बाद जागी सरकार, भाईंदर की श्रद्धा सोसायटी को नोटिस, 7 दिन में दस्तावेज़ नहीं दिए तो कार्रवाई
Shradha Society Dispute: भाईंदर की श्रद्धा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी को भूमि स्वामित्व विवाद में तलाठी कार्यालय ने 7 दिनों के भीतर दस्तावेज़ जमा करने का नोटिस जारी किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
35 साल बाद जागी सरकार
Bhayandar Land Issue: भाईंदर पश्चिम स्थित श्रद्धा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी पर जमीन स्वामित्व को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तलाठी कार्यालय, भाईंदर ने सोसायटी को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर स्वामित्व से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि यह बिल्डिंग और इसके आसपास की चार अन्य इमारतें सरकारी जमीन पर निर्मित हैं।
यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब एक नागरिक ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि सोसायटी जिस भूमि पर बनी है, वह महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज है। शिकायत में कहा गया है कि मौजे भाईंदर के नए सर्वे क्रमांक 297/5 तथा पुराने सर्वे क्रमांक 701/5 से संबंधित रिकॉर्ड संदिग्ध हैं।
नोटिस में क्या कहा गया?
तलाठी कार्यालय से ग्राम महसूल अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा है कि सोसायटी के निवासियों को 7 दिनों के भीतर नगर भवन, मांडली तालाब परिसर स्थित तलाठी कार्यालय में सभी संबंधित दस्तावेज़ जमा कराने होंगे। यदि दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो प्रशासन यह मान लेगा कि सोसायटी सरकारी भूमि पर बनी है और इसे अनधिकृत निर्माण घोषित करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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35 साल बाद क्यों खुली फाइल?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह जमीन विवाद करीब 35 वर्षों से लंबित था। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने पुराने सर्वेक्षण दस्तावेज़ों और भू-अभिलेख फाइलों को दोबारा जांचा, जिसके बाद नोटिस जारी किया गया।
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सोसायटी में हलचल
नोटिस सामने आने के बाद श्रद्धा सोसायटी के निवासियों में चिंता का माहौल है। कई लोग यह जांच कर रहे हैं कि फ्लैट खरीदते समय उन्हें कौन-कौन से दस्तावेज़ प्रदान किए गए थे। सोसायटी प्रबंधन भी अपने स्तर पर पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहा है। बताया जाता है कि श्रद्धा बिल्डिंग का पंजीयन सोसायटी रजिस्ट्रार कार्यालय में हो चुका है, और इसका नाम भूखंड की सात-बारह उतारा पर भी दर्ज है। इसके बावजूद भूमि स्वामित्व की वास्तविकता को लेकर शंका बनी हुई है।
