मीरा भाईंदर मेट्रो प्रोजेक्ट में करोड़ों के घोटाले का आरोप, सरकार ने हाई लेवल जांच के दिए आदेश

Mira Bhyandar Metro Project में कथित करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। विधानसभा में आरोप लगने के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने का ऐलान किया है।
Mira Bhayandar Metro Project
मीरा भाईंदर मेट्रो प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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MMRDA Contractor Corruption Allegations: मीरा भाईंदर मेट्रो प्रोजेक्ट में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है।

विधायक नरेंद्र मेहता ने विधानसभा में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट ने एमएमआरडीए के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य सरकार के खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने विधानसभा में घोषणा की है कि पूरे मामले की डिप्टी चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में हाई-लेवल जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और कॉन्ट्रैक्टर से अतिरिक्त भुगतान की रकम ब्याज सहित वसूली जाएगी।

कास्टिंग यार्ड की जमीन पर उठे सवाल

विधायक मेहता ने आरोप लगाया कि मीरा भाईंदर के चेना क्षेत्र में बनाए गए कास्टिंग यार्ड के लिए जिस जमीन का उपयोग किया जा रहा है, वह इको सेंसिटिव जोन और ट्राइबल रिजर्वेशन से प्रभावित क्षेत्र में आती है। उन्होंने दावा किया कि इस जमीन की बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये है, जबकि कॉन्ट्रैक्टर को इसके लिए 80 करोड़ रुपये का किराया दिया गया। मेहता के अनुसार यह साफ तौर पर सरकारी पैसे की लूट का मामला है।

टेंडर की लागत दोगुनी करने का आरोप

मेहता ने यह भी कहा कि दहिसर मेट्रो स्टेशन के निर्माण का मूल टेंडर लगभग 60 करोड़ रुपये का था, जिसे बाद में बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दिया गया। इससे कॉन्ट्रैक्टर को बड़ा आर्थिक फायदा हुआ।

अन्य शहरों में भी गड़बड़ियों के आरोप

इस चर्चा में तालिका अध्यक्ष संजय केलकर ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि यही कंपनी केवल मीरा भाईंदर ही नहीं बल्कि ठाणे, कल्याण और डोंबिवली क्षेत्रों में भी कई परियोजनाओं मे अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रही है।

सरकार का आश्वासन

मंत्री माधुरी मिसाल ने सदन को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी। यदि यह साबित होता है कि सरकारी धन की हेराफेरी हुई है तो संबंधित कॉन्ट्रैक्टर और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।

प्रोजेक्ट में भारी देरी, कॉन्ट्रैक्टर पर पेनाल्टी क्यों नहीं

दहिसर-मीरा-भाईंदर मेट्रो प्रोजेक्ट को वर्ष 2023 तक पूरा होना था, लेकिन 2026 के बाद भी काम अधूरा है। मेहता ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी देरी के बावजूद कॉन्ट्रैक्टर पर कोई पेनाल्टी क्यों नहीं लगाई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रो लाइन के नीचे बनाए जा रहे पैरेलल फ्लाईओवर का काम टेंडर से ज्यादा दर पर दिया गया और गायमुख ब्रिज का काम बिना टेंडर प्रक्रिया के सीधे उसी कॉन्ट्रैक्टर को सौंप दिया गया।

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