टीईटी अनिवार्यता निर्णय के विरोध में मौन मोर्चा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Solapur News: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय बाकी है, उन्हें दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। टीईटी उत्तीर्ण न करने की स्थिति में दो वर्ष बाद उन्हें जबरन सेवानिवृत्त होना पड़ेगा। इस निर्णय से राज्य में पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले सभी प्राथमिक शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
इसी पृष्ठभूमि पर शिक्षकों की सेवा को संरक्षण देने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए इस प्रमुख मांग को लेकर महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक मध्यवर्ती संगठन की सोलापुर जिला शाखा की ओर से रविवार, अवकाश के दिन, जिलाधिकारी कार्यालय पर हजारों शिक्षकों का मौन मोर्चा निकाला गया।
इस मौन मोर्चे में जिले की जिला परिषद और निजी स्कूलों के लगभग 25 से अधिक शिक्षक संगठनों ने एकजुटता दिखाई। सुबह 11 बजे चार हुतात्मा चौक से मौन मोर्चा शुरू हुआ। इस दौरान हजारों शिक्षकों के हाथों में “हमारा अनुभव ही हमारी पात्रता है”, “अन्यायकारी टीईटी रद्द करो”, “सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करो”, “लड़ाई अस्तित्व की है, टीईटी अनिवार्यता के विरोध की” जैसे नारे लिखे फलक थे। मौन मोर्चा जब जिला परिषद के छत्रपति शिवाजी महाराज प्रवेशद्वार तक पहुंचा, तब वहां सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षकों की मांगों का निवेदन निवासी उपजिलाधिकारी अभिजीत पाटील और शिक्षणाधिकारी कादर शेख को सौंपा गया।
टीईटी अनिवार्यता के विषय में राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। इस प्रमुख मांग के साथ, 15 मार्च 2024 के मान्यता संबंधी शासन निर्णय को रद्द किया जाए, पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए, “शिक्षणसेवक” पद रद्द किया जाए, शिक्षकों को दी जाने वाली सभी ऑनलाइन कार्यों की सक्ती तुरंत बंद की जाए,
सभी विषय शिक्षकों को स्नातक वेतन श्रेणी दी जाए, और आश्रमशाला शिक्षकों की मूल सेवा अवधि को सेवाकाल में गिना जाए ऐसी मांगें निवेदन के माध्यम से सरकार के समक्ष रखी गईं।
टीईटी के संदर्भ में शिक्षकों में गहरा असंतोष फैल गया है, और कई जिला परिषदों में पदोन्नति प्रक्रियाएँ भी रोक दी गई हैं। पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है। आश्रमशालाओं के शिक्षकों के लिए तो टीईटी उत्तीर्ण न करने की स्थिति में वेतन रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार के इतर मागास बहुजन कल्याण विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार कार्यवाही करने का निर्णय लिया, जिससे राज्य के शिक्षकों और संगठनों में और अधिक असंतोष फैल गया है।
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महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक मध्यवर्ती संगठन की ओर से 4 अक्टूबर 2025 को राज्य के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर मौन मोर्चा निकालने का निर्णय लिया गया था। लेकिन उससे पहले, 1 अक्टूबर 2025 को राज्य के स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों की बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने आश्वासन दिया कि टीईटी के संबंध में सरकार की ओर से शीघ्र ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। इस आश्वासन के बाद संगठन ने अपना मौन मोर्चा स्थगित कर दिया था।
हालाँकि, आज तक सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में कोई पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की गई। इसी कारण महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक मध्यवर्ती संगठन की ओर से सरकार से यह मांग करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर मौन मोर्चा निकाला गया, ऐसा संगठन के पदाधिकारियों ने बताया।