प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Municipal Election BJP Internal Conflict: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव की सरगर्मी के बीच शहर की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
शिंदे सेना के वरिष्ठ नेता और जिले के पालकमंत्री संजय शिरसाट ने भारतीय जनता पार्टी में चल रहे आंतरिक विवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि अगर पार्टी नेतृत्व अपने ही कार्यकर्ताओं से बचता फिर रहा है, तो इसमें किसी और की नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही गलती है।
संजय शिरसाट ने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण के समय नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा कि असंतोष भड़क उठा। तंज कसते हुए कहा कि जो कार्यकर्ता दिन-रात पार्टी के लिए मेहनत करते हैं, अगर वह सवाल पूछने आएं और नेता उनसे मिलने से बचें, तो इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं नेतृत्व ने ही चूक की है।
भाजपा कार्यालय में बुधवार को हुए हंगामे पर टिप्पणी करते हुए शिरसाट ने कहा कि यह गुस्सा अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लंबे समय से भीतर ही भीतर सुलग रहा था। टिकट वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी इसका मुख्य कारण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने खुद अपने फैसलों से हालात बिगाड़े हैं। शिरसाट ने यह भी कहा कि चुनावी राजनीति में असली ताकत कार्यकर्ता होते हैं और उन्हें साथ लिए बिना कोई भी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती।
उन्होंने भाजपा नेतृत्व को सलाह दी कि वह आत्ममंथन करे और कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाए, अन्यथा इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
बता दे कि बुधवार को भाजपा द्वारा महानगर पालिका चुनाव को लेकर अदालत रोड पर स्थित तापडिया मैदान में खोले गए पार्टी कार्यालय में गुस्साएं कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें टिकट न मिलने पर हंगामा करते हुए राज्य के ओबीसी विकास मंत्री अतुल सावे, सांसद डॉ. भागवत कराड का घेराव किया था। कुछ कार्यकर्ता अतुल सावे के गाडी के सामने आकर गालियां भी दे रहे थे।
कहा कि काफी देर तक भाजपा कार्यालय पर तनाव की स्थिति बनी हुई थी। भाजपा कार्यालय पर हुई इस हंगामे की खबर पूरे देश भर में फैली, जिससे भाजपा कार्यालय पर गुरुवार को दिन भर शांतिपूर्ण माहौल था। बुधवार को हुए हंगामे को लेकर पार्टी के कुछ पदाधिकारी व कार्यकर्ता अलग अलग चर्चा करते नजर आए।
यह भी पढ़ें:-15 गुना मुनाफे का झांसा, 75 लाख की शेयर ठगी, मनी प्लांट ग्रोथ घोटाला: फेसबुक प्रचार से शुरू हुई ठगी
एक पदाधिकारी ने अपना नाम छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के आला नेताओं ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं को टिकट देने में अनदेखी की।
जिससे यह गुस्सा भड़क उठा। उस पदाधिकारी का कहना था कि अगर भाजपा की शिंदे सेना के साथ अगर युति होती तो यह गुस्सा और अधिक उमड़ता।
इसका खामियाजा भाजपा को ही भुगतना पड़ता था। उधर, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा में टिकट वितरण को लेकर उपजा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है।
संजय शिरसाट के इस बयान से चुनावी माहौल और अधिक गरमाने की संभावना है, वहीं आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में बना रह सकता है।