Solapur Politics: सोलापुर नगर निगम चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Solapur Municipal Election: सोलापुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। BJP की प्रचंड लहर के बावजूद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आठ कॉर्पोरेटर जीतकर BJP के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। वोटों के पोलराइज़ेशन में AIMIM को साफ़ तौर पर लाभ मिला, जबकि कांग्रेस, NCP और शिवसेना की राजनीतिक ताकत में भारी गिरावट देखने को मिली।
BJP की लहर के बीच AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने पक्ष में वोटों का ध्रुवीकरण करने में सफलता हासिल की। 2024 में सोलापुर सिटी सेंटर से AIMIM उम्मीदवार फारूक शबदी ने पार्टी के भीतर चल रहे विवादों के चलते चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद ज़िला अध्यक्ष अशोक पठान को नगर निगम चुनाव की पूरी ज़िम्मेदारी सौंपी गई। फारूक शबदी और शौकत पठान के बीच चले तीखे राजनीतिक टकराव के कारण यह माना जा रहा था कि AIMIM सोलापुर में अपनी ज़मीन खो देगी, लेकिन पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
वार्ड 14 और 20 लंबे समय से AIMIM के गढ़ माने जाते हैं। इन मुस्लिम-बहुल इलाकों में पार्टी ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बना ली और अंत तक निर्णायक दबदबा कायम रखा। विरोधी दलों की ओर से ज़ोरदार प्रयास किए गए, लेकिन मज़बूत संगठनात्मक ढांचा, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं से सीधा संवाद AIMIM की जीत का आधार बना।
पिछले टर्म में AIMIM के 9 कॉर्पोरेटर चुने गए थे, जबकि इस बार पार्टी को 8 सीटों पर जीत मिली। हैदराबाद से आई लगभग 50 सदस्यों की टीम ने ज़मीनी स्तर पर रणनीतिक काम करते हुए कांग्रेस के परंपरागत गढ़ में सेंध लगाई, हालांकि इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ BJP को मिला।
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आने वाले दिनों में नगर निगम की बैठकों, नीतिगत फैसलों और अल्पसंख्यक मुद्दों पर AIMIM की भूमिका और आवाज़ पहले से अधिक प्रभावशाली रहने की संभावना है। अंदरूनी मतभेदों के बावजूद, संगठन निर्माण, स्थानीय मुद्दों पर फोकस और मतदाताओं से सीधा संवाद AIMIM की राजनीतिक मजबूती का आधार बना हुआ है।