Solapur DPC War: दिल्ली में बैठकर नहीं मिलेगा फंड, पालक मंत्री जयकुमार गोरे का MP प्रणिति शिंदे पर तीखा पलटवार
Solapur DPC News: सोलापुर डीपीसी फंड को लेकर जयकुमार गोरे और प्रणिति शिंदे में जुबानी जंग। गोरे बोले- फंड के लिए सोलापुर में बैठना होगा, दिल्ली में नहीं।
- Written By: अनिल सिंह
Jaykumar Gore vs Praniti Shinde (फोटो क्रेडिट-X)
Solapur DPC Fund Controversy: सोलापुर जिले में जिला योजना समिति (DPC) के फंड आवंटन को लेकर राजनीति चरम पर पहुँच गई है। कांग्रेस सांसद प्रणिति शिंदे और सोलापुर के पालक मंत्री जयकुमार गोरे के बीच शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब व्यक्तिगत तंज तक जा पहुँचा है। जहाँ सांसद शिंदे ने फंड न मिलने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है, वहीं पालक मंत्री गोरे ने उन्हें “जमीनी स्तर पर काम करने और अध्ययन करने” की सलाह दी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सांसद प्रणिति शिंदे ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि जिला परिषद और उनके क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए जानबूझकर धनराशि रोकी जा रही है।
“दिल्ली बनाम सोलापुर” का मुद्दा
सांसद प्रणिति शिंदे की चेतावनी का जवाब देते हुए पालक मंत्री जयकुमार गोरे ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “जिला योजना समिति का फंड हवा में नहीं मिलता। इसके लिए सोलापुर में रहकर बैठकों में शामिल होना पड़ता है। दिल्ली में बैठकर जिला विकास की योजनाएं नहीं समझी जा सकतीं।” गोरे ने तंज कसते हुए कहा कि जब उपसभा की बैठक में निधि की मंजूरी पर चर्चा हो रही थी, तब सांसद वहां उपस्थित क्यों नहीं थीं? उन्होंने सलाह दी कि सांसद को पहले नियमों का अध्ययन करना चाहिए और फिर बोलना चाहिए।
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56 करोड़ और 100 करोड़ का हिसाब
पालक मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सांसद के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि सोलापुर नगर निगम को विभिन्न योजनाओं के लिए डीपीसी से 100 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं। इसके अतिरिक्त, अक्कलकोट रोड एमआईडीसी की सड़कों के लिए 56 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। गोरे ने चुनौती देते हुए पूछा, “सांसद शिंदे उन कार्यों की सूची दें जिन्हें वे रद्द करवाना चाहती हैं, क्योंकि हमने सोलापुर लोकसभा क्षेत्र को नियमों के अनुसार ही फंड दिया है।”
मई की बैठक में बढ़ेगी तपिश
जयकुमार गोरे ने स्पष्ट किया कि जिला योजना समिति का कोष किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं दिया जाता, बल्कि इसका उपयोग सामाजिक और भौगोलिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने शिंदे परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपना “अहंकार” छोड़कर विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
वर्तमान में सोलापुर की राजनीति इस विवाद के कारण गरमाई हुई है। जिला योजना समिति की अगली बैठक मई 2026 में होनी है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निधि का आवंटन किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि उस बैठक में दोनों नेताओं के बीच एक बार फिर जोरदार भिड़ंत देखने को मिल सकती है।
