किसान कर्जमाफी के लिए रोहित पवार का बड़ा ऐलान, 12 जून को पंढरपुर में करेंगे अन्न त्याग आंदोलन
Maharashtra Farmers Loan Waiver Protest: एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी और जनहित के मुद्दों को लेकर 12 जून से पंढरपुर में बड़े अन्न त्याग आंदोलन की घोषणा की है।
- Written By: आकाश मसने
किसान कर्जमाफी के लिए रोहित पवार पंढरपुर में करेंगे अन्न त्याग आंदोलन (डिजाइन फोटो)
Rohit Pawar Pandharpur Protest: महाराष्ट्र की सियासत में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक रोहित पवार ने किसानों को न्याय दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। उन्होंने 12 जून से सोलापुर जिले के पंढरपुर में अन्न त्याग आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान रोहित पवार ने कहा कि किसानों की समस्या को लेकर केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़क पर उतरकर संघर्ष करना होगा। उन्होने कहा की स्वास्थ, शिक्षा, और आम जनता से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार का ध्यान लाने के लिए जनआंदोलन जरूरी है। उनका मानना है कि जबतक लोग एकजुट होकर अपनी आवाज नहीं उठाते, तब तक जमीनी स्तर पर बदलाव लाना मुश्किल होता है।
कर्जमाफी करवाकर रहेंगे: रोहित पवार
रोहित पवार ने कहा कि उन्हें यही सीख मिली है की जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने ये स्पष्ट किया कि वो जनता के मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उनका कहना था कि अन्न त्याग आंदोलन का उद्देश्य किसानों के लिए न्याय की मांग को मजबूती देना और सरकार तक उनकी आवाज को पहुंचाना है।
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उन्होंने भरोसा जताया कि यह आंदोलन किसानों की समस्याओं उठाया जाएगा और सरकार तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वो किसानों को न्याय दिलाने का हर संभव प्रयास करेंगे और उनका कर्ज माफ करवाकर रहेंगे।
पंढरपुर में आंदोलन वाली जगह पर नहीं लगा बाजार
राेहित पवार ने इसकी जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि हम पंढरपुर में छत्रपति शिवाजी महाराज और पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर के स्मारक वाले परिसर में किसान कर्जमाफी की मांग को लेकर अन्न त्याग आंदोलन करने वाले है।
छत्रपती शिवाजी महाराज आणि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर यांचं स्मारक असलेल्या परिसरातच पंढरपुरात शेतकरी कर्जमाफीसाठी आम्हाला ‘अन्नत्याग’ आंदोलन करायचं आहे आणि ते होणारच आहे. ही बाब या परिसरातील स्टॉलधारकांना समजल्याने आणि आमच्या शहराध्यक्षांनीही त्यांना विनंती केल्याने या सर्व… pic.twitter.com/6ryn8njhv9 — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 11, 2026
पवार ने कहा कि इस बारे में पता चलने पर और हमारे शहर अध्यक्ष के अनुरोध पर स्थानीय स्टॉल मालिकों ने तुरंत जगह उपलब्ध करा दी और किसानों के भले के लिए किए जा रहे इस जायज आंदोलन को अपना समर्थन दिया। यह इंसानियत, महाराष्ट्र की भावना और किसान समुदाय के प्रति प्यार की मिसाल है। हालांकि, यह दुख की बात है कि सरकार वह बात नहीं समझ पा रही है जिसे आम लोग इतनी अच्छी तरह समझते हैं।
सरकार को अब या तो विरोध प्रदर्शन की मंजूरी देनी चाहिए या अगर वह ऐसा करने से इनकार करती है तो किसान कर्जमाफी से जुड़ी शर्तें हटानी चाहिए। वरना, चाहे कितनी भी रुकावटें क्यों न आएं, यह विरोध प्रदर्शन नहीं रुकेगा। यह होकर रहेगा, चाहे कुछ भी हो जाए।
क्या हैं रोहित पवार की मांगें?
- जिन किसानों को 2019 में कर्जमाफी का लाभ मिला था, उनके लिए 50,000 की सीमा वाली शर्त हटाई जानी चाहिए और सभी किसानों को 2 लाख तक की पूरी कर्जमाफी दी जानी चाहिए।
- वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम के तहत, जिन किसानों को 2019 की स्कीम का लाभ मिला था, उनके लिए 50,000 की सीमा वाली शर्त हटाई जानी चाहिए और सभी किसानों को 2 लाख तक की पूरी कर्जमाफी मिलनी चाहिए।
- जिन किसानों पर 2 लाख से ज्यादा का बकाया है, सरकार को उनसे सीमा से ज्यादा रकम पहले जमा कराए बिना ही 2 लाख तक की पूरी कर्जमाफी देनी चाहिए।
- इंसेंटिव सब्सिडी पाने के लिए लगातार दो साल तक नियमित रूप से कर्ज चुकाने की शर्त हटाई जानी चाहिए।
- उन 6.56 लाख किसानों का कर्ज तुरंत माफ किया जाना चाहिए जो 2017 की माफी के लिए पात्र थे, लेकिन सिर्फ कागजात न होने की वजह से उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया था।
- फसल बीमा योजना में किसानों के लिए मुश्किल और किसान-विरोधी ‘ट्रिगर’ क्लॉज़ हटाए जाने चाहिए और इस योजना को किसानों के लिए 1 रुपए के खर्च पर फिर से लागू किया जाना चाहिए।
- बुवाई के मौसम से पहले कर्ज खातों को रीस्ट्रक्चर किया जाना चाहिए और बुवाई के कामों में मदद के लिए किसानों के खातों में पैसे जमा किए जाने चाहिए।
गेल्या तीन-चार वर्षापासून मोठ्या आर्थिक संकटात सापडलेल्या शेतकऱ्यांना कर्जमाफीची आशा होती, परंतू सरकारने जाहीर केलेल्या कर्जमाफीतील जाचक अटी शर्तींमुळं बहुतांश शेतकरी कर्जमाफिपासून वंचित राहणार आहेत. सरकारने कर्जमाफी योजनेतील या जाचक अटीशर्ती काढून शेतकऱ्यांना सरसकट कर्जमाफीचा… pic.twitter.com/qDXwcWqD6s — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 6, 2026
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टीएमसी विवाद पर क्या बोले राेहित पवार?
इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीति पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। टीएमसी का कांग्रेस में शामिल होने की चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में अभी तक टीएमसी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आए है, इसलिए एसी चरचाओं को विश्वसनीय मानना गलत है। उनका कहना था कि अभी सभी पार्टियों को एक-साथ बीजेपी के खिलाफ खड़ा होना है।
