

Devendra Fadnavis Cabinet Decisions: महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या और कृषि संकट को देखते हुए समय-समय पर सरकारों द्वारा कर्जमाफी की घोषणाएं की जाती रही हैं। लेकिन अक्सर देखा गया है कि विभिन्न नियमों, बैंकों के ढुलमुल रवैये और ऑनलाइन पंजीकरण की तकनीकी दिक्कतों की वजह से बड़ी संख्या में जरूरतमंद किसान लाभ पाने से चूक जाते हैं। इसी समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में एक बेहद मानवीय और संवेदनशील निर्णय लिया गया, जिससे राज्य के कृषि क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।
इस फैसले के जरिए सरकार ने उन किसानों के घावों पर मरहम लगाने का काम किया है जो सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। फैसले के मुताबिक सरकार उन किसानों को भी किसान कर्जमाफी का लाभ देगी जो पिछली कर्जमाफी से वंचित रह गए हैं।
विगत वर्षों में, विशेष रूप से साल 2017 और साल 2019 के दौरान तत्कालीन सरकारों द्वारा किसानों के लिए बड़े स्तर पर ऋण माफी योजनाओं की घोषणा की गई थी। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई लाख किसान ऐसे थे जो पात्रता सूची में होने के बावजूद किसी न किसी विभागीय त्रुटि या बैंक स्तर पर हुए पेंच के कारण इस योजना के अंतिम लाभ से महरूम रह गए थे। ये किसान पिछले कई वर्षों से लगातार सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे थे। आज कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि इन फंसे हुए सभी किसानों की फाइलों को दोबारा खोला जाएगा और उन्हें शत-प्रतिशत लाभ दिया जाएगा।
इस कड़े और बड़े फैसले को धरातल पर उतारने के लिए केवल प्रशासनिक आदेश ही जारी नहीं किए गए हैं, बल्कि वित्तीय प्रावधानों को भी तुरंत हरी झंडी दे दी गई है। राज्य सरकार इस पूरी विशेष कर्जमाफी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपने खजाने से लगभग 14,000 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि खर्च करने जा रही है। इस फंड के जरिए सीधे उन बैंकों के बकाए का भुगतान किया जाएगा, जहां इन वंचित किसानों के कृषि ऋण खाते सालों से एनपीए (NPA) या फ्रीज पड़े हुए थे, जिससे उन्हें अब नया लोन मिलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
विपक्ष और विभिन्न किसान अधिकार मंचों द्वारा विधानसभा से लेकर सड़कों तक यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा था कि जब तक पुराने अटके हुए किसानों का कर्ज साफ नहीं होता, तब तक राज्य में कृषि सुधार अधूरे रहेंगे। आज की बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि हमारी सरकार पूरी तरह से किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय राजनीति से ऊपर उठकर केवल और केवल उन गरीब किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए लिया गया है जो कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण नई फसलों के लिए बैंकों से वित्तीय मदद नहीं ले पा रहे थे।