

PM eBus Sewa Solapur: स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ते कदम और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन का सपना फिलहाल सोलापुर के नागरिकों के लिए प्रशासनिक फाइलों और चार्जिंग डिपो में उलझकर रह गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'PM-eBus Sewa' योजना के तहत सोलापुर महानगरपालिका को मंजूर की गई 100 इलेक्ट्रिक बसें पिछले डेढ़ महीने से ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के यार्ड में धूल फांक रही हैं। भव्य उद्घाटन के बावजूद शहरवासी आज भी पुरानी और खटारा परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को पालकमंत्री जयकुमार गोरे और सोलापुर महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में ई-बसों के पहले बैच का बड़े धूमधाम से उद्घाटन किया गया था। उस समय नागरिकों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें वातानुकूलित और आधुनिक ई-बसों में सफर करने का मौका मिलेगा।
हालांकि, डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी एक भी बस सड़क पर नहीं उतर सकी है। इसका मुख्य कारण चार्जिंग स्टेशनों और जरूरी तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का समय पर तैयार न हो पाना है। बिना चार्जिंग पॉइंट के इन बसों का संचालन पूरी तरह असंभव बना हुआ है।
बढ़ते जन आक्रोश और मीडिया के सवालों के बीच सोलापुर नगर निगम प्रशासन अब हरकत में आया है। मेयर विनायक कोंड्याल, डिप्टी मेयर ज्ञानेश्वरी देवकर, स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन रंजीता चाकोटे, हाउस लीडर नरेंद्र काले और म्युनिसिपल कमिश्नर डॉ. सचिन ओम्बासे ने हाल ही में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 5 चार्जिंग स्टेशन प्राप्त हो चुके हैं और उन्हें स्थापित करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। 10 अक्टूबर तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस काम के पूरा होते ही दशहरा के शुभ अवसर पर सोलापुर में ई-बस सेवा को आधिकारिक रूप से जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
एक तरफ जहां ई-बसों का पहिया थमा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट कमेटी के गठन का मुद्दा भी पिछले 6 महीने से अटका पड़ा है। सोलापुर मनपा प्रशासन को पद संभाले 8 महीने हो चुके हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट कमेटी के सदस्यों का चुनाव नहीं हो पाया है।
पहली बैठक के एजेंडे में चेयरमैन के चुनाव का मुद्दा शामिल था, लेकिन उसके बाद हुई लगातार 5 बैठकों में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी भाजपा के भीतर इस बात को लेकर भारी अंदरूनी विरोध चल रहा है कि कमेटी में जमीनी कार्यकर्ताओं को जगह दी जाए या कॉर्पोरेटर्स को। हालांकि सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान के कारण चयन प्रक्रिया ठप पड़ी है।
नतीजतन, प्रशासनिक निर्णय लेने वाली यह अहम कमेटी आज भी अधर में लटकी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन 10 अक्टूबर तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर दशहरा पर सोलापुर वासियों को ई-बस का तोहफा दे पाता है या नहीं।