Mumbai Clean Air Ranking: ई-बसों पर ₹493 करोड़ खर्च, फिर भी वायु गुणवत्ता सुधार में उठे सवाल

Mumbai Ranking Drops: 15वें वित्त आयोग के 573 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में मुंबई 28वें स्थान पर खिसक गई है। ई-बसों पर सबसे ज्यादा फंड खर्च हुआ।
Clean Air Index in Mumbai drops despite ₹573 crore expenditure: National survey
बेस्ट बसें, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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National Clean Air Survey: मुंबई शहर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मुंबई की स्वच्छ वायु रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है। 15वें वित्त आयोग के तहत मिले ₹620.11 करोड़ में से ₹573.88 करोड़ यानी 92.54 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है।

इसके बावजूद स्वच्छ वायु रैंकिंग 2026 में मुंबई 48 बड़े महानगरों में 28वें स्थान पर रही। पिछले साल शहर 25वें स्थान पर था, जबकि 2023 में मुंबई 10वें स्थान पर रही थी।

ई-बसों पर खर्च हुआ सबसे बड़ा हिस्सा

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीएमसी ने इस फंड का सबसे बड़ा हिस्सा बेस्ट की इलेक्ट्रिक बसों के लिए इस्तेमाल किया। ₹493.37 करोड़ यानी करीब 79.56 प्रतिशत राशि बेस्ट को ई-बसों की खरीद के लिए दी गई।

हालांकि, इस खर्च के बावजूद BEST का कुल बस बेड़ा बढ़ने के बजाय घटा है। 2021-22 में बेस्ट के पास 3,546 बसें थीं, जो 2026-27 में घटकर 2,532 रह गईं। मार्च 2022 में 2,100 इलेक्ट्रिक बसों का ठेका दिया गया था और इनकी डिलीवरी अगस्त 2023 तक पूरी होनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब आधी बसों की डिलीवरी ही हो सकी है।

प्रदूषण के स्रोतों पर अपेक्षाकृत कम खर्च

BMC के पास इस फंड से करीब ₹46.23 करोड़ की राशि शेष बताई गई है। इसमें ₹21.47 करोड़ कचरा प्रसंस्करण, ₹9.27 करोड़ हरित क्षेत्र बढ़ाने और ₹8.47 करोड़ श्मशान घाटों में पाइप्ड गैस सुविधा के लिए निर्धारित हैं।

इसके मुकाबले प्रदूषण के स्रोतों और शोध से जुड़े कार्यों पर अपेक्षाकृत कम राशि खर्च हुई। आईआईटी बॉम्बे की विशेषज्ञ एवं शोध सेवाओं के लिए ₹50 लाख का प्रावधान किया गया था, जबकि वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान पर ₹36 लाख खर्च किए गए।

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प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति पर विशेषज्ञों का जोर

मुंबई के वायु प्रदूषण में केवल वाहनों की भूमिका ही नहीं, बल्कि निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल, सड़क की धूल और खुले में कचरा जलाने जैसे स्रोत भी महत्वपूर्ण हैं। बीएमसी की अपनी वायु प्रदूषण नियंत्रण योजना में भी इन स्रोतों को प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल किया गया है।

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वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ. गुफरान बेग के अनुसार, स्थानीय प्रदूषण स्रोतों और हॉटस्पॉट की पहचान के साथ क्षेत्रवार समाधान तैयार करने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और अन्य स्थानीय स्रोतों पर भी समान रूप से प्रभावी रणनीति जरूरी है।

इस बीच, मुंबई बीएमसी ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों की निगरानी और धूल नियंत्रण पर नए सिरे से जोर देना शुरू किया है। सितंबर में नागरिक प्रशासन ने प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर धूल उत्सर्जन की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा भी की है।

प्रदूषण स्रोतों की नई मैपिंग की तैयारी

बीएमसी और ARAI मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रदूषण उत्सर्जन का हाई-रिजॉल्यूशन इन्वेंटरी तैयार करने के लिए फील्ड रिसर्च भी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग मौसम में प्रदूषण के स्रोतों और उनके प्रभाव को बेहतर ढंग से समझना है।

ऐसे में मुंबई शहर की गिरती स्वच्छ वायु रैंकिंग के बीच सवाल यह है कि उपलब्ध संसाधनों का कितना हिस्सा सीधे प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करने में लगाया जा रहा है और खर्च की गई राशि का वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव कितना रहा है।

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