शिंगणापुर देवस्थान ई-ऑफिस प्रणाली की ओर अग्रसर, प्रशासन में आएगा अनुशासन और पारदर्शिता
Shani Shingnapur Temple: शनि शिंगणापुर देवस्थान में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से प्रशासन में पारदर्शिता, अनुशासन और कार्यकुशलता बढ़ेगी, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
- Written By: आंचल लोखंडे
(digital governance सोर्सः सोशल मीडिया)
Shingnapur Administration Reform: देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में आस्था का केंद्र माने जाने वाले शनि शिंगणापुर देवस्थान अब आधुनिक प्रशासन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रशासनिक कार्यों को भी अधिक अनुशासित, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया जा रहा है। मंदिर का प्रबंधन संभागीय आयुक्त द्वारा किया जाता है।
कार्यभार संभालते ही आयुक्त ने प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और कुशल शासन को प्राथमिकता दी है। इसी के तहत डिजिटल परिवर्तन प्रक्रिया को तेज किया गया है और मंदिर में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की जा रही है।नासिक संभागीय आयुक्त के निर्देशानुसार शनेश्वर मंदिर, शिंगणापुर में ई-ऑफिस प्रणाली का आधिकारिक रूप से कार्यान्वयन शुरू हो चुका है और इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम
इसी पृष्ठभूमि में मंदिर के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में संभागीय आयुक्त कार्यालय से क्रुणाल दारुंडे और अतुल चोरमारे ने ई-ऑफिस प्रणाली की कार्यप्रणाली, इसके लाभ और कार्यान्वयन की बारीकियों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।
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पारदर्शिता को मिलेगा बल
ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज, समयबद्ध और अधिक जवाबदेह बनेगी। प्रत्येक निर्णय का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पारदर्शिता मजबूत होगी। इससे श्रद्धालुओं से जुड़े मामलों, विकास कार्यों, वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक आदेशों को अधिक सुव्यवस्थित तरीके से लागू करना संभव हो सकेगा।
कर्मचारियों को मिला तकनीकी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजीकरण, सरकारी पत्राचार, फाइल प्रबंधन, निर्णय प्रक्रिया और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सुरक्षित डिजिटल संरक्षण की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से दैनिक प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह कागज रहित कैसे संचालित किया जा सकता है। इस दौरान प्रदर्शन के माध्यम से हर चरण को समझाया गया। मंदिर के सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया और डिजिटल व्यवस्था अपनाने को लेकर सकारात्मक रवैया दिखाया।
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श्रद्धालुओं की आस्था होगी मजबूत
अतुल चोरमारे ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से काम में होने वाली देरी कम होगी और अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से सभी विभागों को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। यह परिवर्तन सरकार की ई-गवर्नेंस नीति के अनुरूप है और इससे मंदिर प्रशासन के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
