Pandharpur Highway Accident (फोटो क्रेडिट-X)
Pandharpur Highway Accident: महाराष्ट्र के सतारा जिले में पंढरपुर तीर्थयात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के लिए आज की सुबह काल बनकर आई। सतारा-पंढरपुर मार्ग पर धुलदेव गांव (म्हसवड के पास) के निकट एक भीषण सड़क हादसे में एक ऑल्टो कार अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में दो यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा उस स्थान पर हुआ जहाँ सड़क का काम अधूरा पड़ा है, जिससे एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है।
हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को मलबे से बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की गति सामान्य थी, लेकिन सड़क पर अचानक आए उबड़-खाबड़ और अधूरे निर्माण कार्य के कारण चालक नियंत्रण खो बैठा। तीर्थयात्रियों का यह समूह पंढरपुर में विट्ठल-रुक्मिणी के दर्शन के लिए निकला था, लेकिन मंजिल तक पहुँचने से पहले ही यह हादसा हो गया।
धुलदेव गांव के पास जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां सड़क का काम पिछले कई वर्षों से कछुआ गति से चल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने सड़क को आधा खोदकर छोड़ दिया है, जिससे यहां ‘ब्लाइंड स्पॉट’ बन गए हैं। रात के अंधेरे या सुबह के धुंधलके में बाहरी ड्राइवरों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं मिल पाता। पिछले एक साल में इसी छोटे से पैच पर दर्जनों छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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हादसे के बाद कार के परखच्चे उड़ गए थे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़े और घायलों को पानी पिलाकर उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल तीन यात्रियों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस जानलेवा सड़क को ठीक करने की जहमत नहीं उठाई।
सतारा-पंढरपुर मार्ग पर बढ़ते हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक अब सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद पंचनामा करने पहुँचता है, लेकिन निवारक कदम (Preventive measures) शून्य हैं। यात्रियों की मांग है कि जब तक सड़क का स्थायी निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक वहां स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं ताकि अनजान चालकों को खतरे का आभास हो सके।