ट्रैफिक सुधार या सफाई मिशन? नागपुर में कबाड़ वाहनों पर सख्ती, ट्रैफिक पुलिस का बड़ा अभियान
Nagpur Traffic Police: नागपुर ट्रैफिक पुलिस ने सड़कों किनारे खड़े कबाड़ वाहनों को हटाने का अभियान तेज किया है। कार्रवाई से सड़कें खुली दिख रही हैं, लेकिन कई इलाकों में अब भी ऐसे वाहन परेशानी बने हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर ट्रैफिक पुलिस,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Traffic Police Road Encroachment: नागपुर शहर की सड़कों के किनारे वर्षों से जंग खाकर खड़े कबाड़ वाहनों को हटाने के लिए नागपुर ट्रैफिक पुलिस ने अब सख्त अभियान छेड़ दिया है। सदर स्थित बोहरा मस्जिद के बाहर हाल ही में की गई कार्रवाई के बाद क्षेत्र की सड़कें खुली और व्यवस्थित नजर आने लगी हैं। डीसीपी लोहित मतानी के नेतृत्व में जारी इस सफाई अभियान की इन तस्वीरों ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन लगातार कार्रवाई करे तो ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है।
हालांकि शहरवासियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है क्योंकि नागपुर के कई हिस्सों में अब भी सड़कें कबाड़ वाहनों के कब्जे में हैं। बात सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है। कबाड़ वाहनों की जंग से निकले विषैली पदार्थ शहर ही हवा भी खराब कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई को मिल रहा समर्थन
स्थानीय नागरिकों ने ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे लगातार जारी रखने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल कुछ वाहन हटाने से समस्या खत्म नहीं होगी। हर जोन में विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की पहचान करनी होगी। नागरिकों ने यह भी मांग की है कि सार्वजनिक सड़कों को स्थायी पार्किंग या कबाड़खाना बनाने वाले वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए लेकिन शहर को कबाड़ वाहनों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए अभी लंबी लड़ाई बाकी है।
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जंग खाए कबाड़ वाहन कैंसर जैसी बीमारियों के उत्प्रेरक
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले में पड़े जग लगे वाहन केवल ट्रैफिक समस्या ही नहीं बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। इनसे से निकले जहरीले पदार्थ हवा में घुलकर लोगों की सांसों में भी समा रहे हैं और कैसर जैसी घातक बीमारियों के कारण भी बन रहे है। इनकी जग से निकलने वाले लेड, एस्बेस्टस, ऑयल और अन्य जहरीले रसायन मिट्टी, हवा और पानी की प्रदूषित करते हैं। इनके लगातार संपर्क में आने से त्वचा रोग, सास संबंधी संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
- पुरानी कारों के इंजन से इंजन ऑयल, बैंक पलूइड, कूलेट और बैटरी एसिड रिसकर जमीन में समा जाते हैं जिससे मिट्टी और भूजल प्रदूषित हो जाते हैं।
- जंग लगे पुजें, पेट के कण और कबाड़ को जलाने से हवा में हानिकारक टॉक्सिन और भारी धातुए फैलती है जो के अनुसार सांस लेने योग्य हवा को दूषित करती हैं।
- यह प्रदूषण स्थानीय जल निकायों (नदियों, तालाबों) में पहुंचकर जलीय जीवन को खतरे में डालता है।
- खुले में पड़े कचाड़ के सहने और जंग लगने से उठने वाली महीन घुल और गंध से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही है।
- कबाड़ वाहन चूहों, मच्छरों और अन्य कीटाणुओं के प्रजनन स्थल बन जाते हैं जो डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों को फैलाते है।
- जंग लगे तेज वार वाले पुजें, टूटा हुआ कांच और अनधिकृत रूप से कबाड़ के अंदर बच्चों के फंस जाने से गंभीर दुर्घटनाएं या टिटनेस का खतरा रहता है।
सड़कें बनीं कबाड़खाना, बढ़ रही लोगों की परेशानी
कामठी रोड, जरीपटका, गणेशपेठ, इतवारी, लकड़गंज, पाचपावली, मोमिनपुरा, सीताबर्डी, अजनी, काछीपुरा, मानकापुर, काटोल रोड, हिंगना, वाड़ी और वर्धा रोड जैसे इलाकों में सड़क किनारे महीनों और कई बार वर्षों से खड़े पुराने वाहन ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं।
कई वाहन बिना नंबर प्लेट के हैं तो कुछ पूरी तरह जंग खाकर टूट चुके हैं।
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इन वाहनों के कारण सड़के संकरी हो रही हैं जिससे जाम की स्थिति बनती है। खासकर बाजार और स्कूल क्षेत्रों में राहगीरों तथा वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फुटपाथों पर कब्जे के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरना पड़ता है जिससे दुर्घटनाओं का खतरा रहता है।
