पिंपरी-चिंचवड़ नदी सुधार प्रोजेक्ट पर विवाद, 7,500 करोड़ की योजना में भ्रष्टाचार और पर्यावरण नुकसान के आरोप
Pimpri Chinchwad News: पिंपरी-चिंचवड़ के 7500 करोड़ के नदी पुनरुत्थान प्रोजेक्ट पर सामाजिक कार्यकर्ता मारुति भापकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया, पर्यावरण नुकसान पर रोक की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
नदी सुधार प्रोजेक्ट (सोर्स: सोशल मीडियाे)
Pimpri Chinchwad River Improvement Project: पिंपरी-चिंचवड़ शहर से बहने वाली तीन प्रमुख नदियों- इंद्रायणी, पवना और मुला के पुनरुत्थान के नाम पर शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना अब बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में घिर गई है। केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक मदद से चलाए जा रहे इस ‘रिवर रिवाइटलाइजेशन प्रोजेक्ट’ पर कुल 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।
इसके तहत पहले चरण में मुला नदी के लिए 1,100 करोड़, इंद्रायणी के लिए 1,400 करोड़ और पवना नदी के लिए 1,700 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। वर्तमान में मुला नदी पर सुधार कार्य जारी है, लेकिन पर्यावरणविदों का आरोप है कि विकास के नाम पर नदी की प्राकृतिक जैव विविधता को पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। चौड़े नदी तटों को कंक्रीट डालकर संकरा किया जा रहा है और हजारों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।
पिंचिं में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की आवश्यकता
इस पूरे प्रोजेक्ट की प्रासंगिकता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मारुति भापकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मनपा आयुक्त डॉ। विजय सूर्यवंशी और महापौर रवि लांडगे को एक विस्तृत पत्र भेजकर इस परियोजना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
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भापकर ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में खुद यह बात साफ तौर पर स्वीकार की गई है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इस योजना से कोई राहत नहीं मिलेगी। इसके अलावा, इस भारी खर्च से नदियों का केवल पांच प्रतिशत ही शुद्धिकरण हो पाएगा, जबकि बजट का बड़ा हिस्सा केवल सौंदर्याकरण और सिविल कंस्ट्रक्शन के कामों पर उड़ाया जा रहा है।
आरोप है कि राजनीतिक नेताओं, बिल्डरों और अधिकारियों के निजी हितों को साधने के लिए टीडीआर, एफएसआई, व्यावसायिक भवनों और पार्किंग व्यवस्था के नाम पर इस विनाशकारी प्रोजेक्ट को जबरन लागू किया जा रहा है। शहर की वास्तविक और बुनियादी समस्या नदियों में मिलने वाला गंदा सीवेज और औद्योगिक रसायन है। पिंपरी-चिंचवड़ में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की आवश्यकता के अनुसार वर्तमान में पवना डैम, एमआईडीसी और आंध्रा डैम को मिलाकर कुल 610 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है।
300 MLD पानी साफ करने की ही व्यवस्था
इसके अतिरिक्त करीब 100 एमएलडी पानी बोरवेल और टैंकरों के जरिए उपयोग में आता है। वाष्पीकरण और अन्य नुकसानों के बाद नदियों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पिंपरी-चिंचवड़ शहर में कम से कम 550 से 600 एमएलडी क्षमता का सुचारू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, मनपा के पास वर्तमान में केवल 300 एमएलडी गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है। और भ्रष्टाचार के चलते उनमें से भी कितने प्लांट वास्तव में चालू है, यह बड़ी जांच का विषय है। यही हाल नई बनी हाउसिंग सोसायटियों का है,
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तीन प्रतिशत कम दर वाले टेंडर को किया गया मंजूर
विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब आलंदी और देहू जैसे पवित्र तीर्थस्थलों से होकर बहने वाली इंद्रायणी नदी के काम के लिए 1 जुलाई 2026 को जल्दबाजी और कथित तौर पर अवैध बैठक बुलाकर लगभग 443 करोड़ 51 लाख रुपये का टेंडर मंजूर कर लिया गया। इस टेंडर प्रक्रिया में कुल आठ ठेकेदारों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से महाराष्ट्र के पांच स्थानीय ठेकेदारों को जानबूझकर अयोग्य घोषित कर दिया गया और गुजरात की कंपनी मेसर्स एल. सी.इंद्रा प्राइवेट लिमिटेड के तीन प्रतिशत कम दर वाले टेंडर को हरी झंडी दिखा दी गई।
पर्यावरण विरोधी प्रोजक्ट को तत्काल किया जाए रद्द
मारुति भापकर ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस वित्तीय समझौते और पर्यावरण विरोधी प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द किया जाए। आलंदी और देहू जैसे तीर्थस्थलों के घाटों का सीमित सौंदर्याकरण तो स्वीकार्य है, लेकिन पूरी नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करना आत्मघाती साबित होगा। सरकार को इस फिजूलखर्च को रोककर पूरा ध्यान और फंड तीनों नदियों के स्रोतों पर ही आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने में निवेश करना चाहिए
