MNS-BJP Alliance: क्या मुंबई में एक होंगे राज और बीजेपी? एमआईजी क्लब की बैठक के बाद ठाकरे ने किया बड़ा खुलासा
Raj Thackeray on BJP Alliance: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई महानगरपालिका में बीजेपी के साथ गठबंधन की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। जानें क्या है उनका 'लचीला राजनीतिक रुख'।
- Written By: अनिल सिंह
Raj Thackeray On MNS-BJP Alliance (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
MNS-BJP Alliance News: महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन और समीकरणों के बदलते दौर के बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एक बड़ा बयान देकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका की तर्ज पर मुंबई में भी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ हाथ मिला सकती है। हालांकि, सोमवार को राज ठाकरे ने स्पष्ट कर दिया कि मुंबई महानगरपालिका में उनकी पार्टी किसी भी सत्ताधारी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब मुंबई नगर निगम में मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सोमवार सुबह जैसे ही बीजेपी और शिंदे गुट के पार्षद पंजीकरण के लिए कोकण भवन की ओर रवाना हुए, राजनीतिक गलियारों में यह खबर फैल गई कि मनसे के पार्षद सत्ता पक्ष को समर्थन दे सकते हैं। लेकिन बांद्रा स्थित एमआईजी क्लब में अपनी पार्टी की बैठक के बाद बाहर निकलते ही राज ठाकरे ने कड़े लहजे में कहा, “हम मुंबई में बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। मैं कह रहा हूं ना, नहीं मतलब नहीं।”
एमआईजी क्लब में मनसे की मंथन बैठक
सोमवार सुबह बांद्रा के एमआईजी क्लब में राज ठाकरे ने पार्टी के पराजित उम्मीदवारों, विभाग अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में संदीप देशपांडे जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव परिणामों की समीक्षा करना और आगामी रणनीति तय करना था। जैसे ही बैठक के अंदर से गठबंधन की खबरें बाहर आईं, राज ठाकरे ने मीडिया के सामने आकर स्थिति साफ की। उन्होंने संकेत दिया कि मुंबई में मनसे अपनी स्वतंत्र पहचान और विपक्ष की भूमिका को प्राथमिकता देगी।
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कल्याण-डोंबिवली का फैसला और आलोचना
राज ठाकरे के इस कड़े रुख के पीछे हालिया घटनाक्रमों को माना जा रहा है। कुछ दिन पहले मनसे ने कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दिया था, जिसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनकी काफी आलोचना हुई थी। आलोचकों का तर्क था कि जिस पार्टी के खिलाफ चुनाव प्रचार में राज ठाकरे ने तीखे प्रहार किए थे, चुनाव के बाद उसी के साथ जाना वैचारिक विरोधाभास है। इस आलोचना ने मनसे कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी।
क्या है राज ठाकरे का ‘लचीला राजनीतिक रुख’?
गठबंधन की आलोचनाओं के बीच राज ठाकरे ने पिछले दिनों अपने ‘लचीले राजनीतिक रुख’ (Flexible Political Stand) का बचाव किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी राजनीति में लचीलापन किसी व्यक्तिगत लाभ या सत्ता की लालसा के लिए नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरा यह रुख मनसे के अस्तित्व और मराठी लोगों के व्यापक हित में है।” हालांकि, मुंबई के संदर्भ में उन्होंने यह साफ कर दिया कि फिलहाल बीजेपी के साथ जाने का कोई इरादा नहीं है। राज ठाकरे के इस फैसले से अब मुंबई मेयर चुनाव के समीकरण पूरी तरह से स्पष्ट हो गए हैं।
