रेलवे इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते अधिकारी (सोर्स: एक्स@Central_Railway)
मुंबई: देश में रेल विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे हो गए है। रेलवे अपनी इस उपलब्धि का जश्न मना रहा है। इस उपलक्ष्य में 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया है। इसके लिए वित्त मंत्रालय की तरफ से गजट जारी कर दिया गया है। यह सिक्का इस ऐतिहासिक उपलब्धि को प्रदर्शित करने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है और इसे विशेष रूप से संग्राहकों और रेलवे प्रेमियों के लिए पेश किया जाएगा।
मध्य रेलवे ने रेलवे विद्युतीकरण के शताब्दी वर्ष के अवसर पर महाराष्ट्र के दो प्रतिष्ठित जीवित युद्ध नायकों के सम्मान में दो इंजनों का नामकरण उनके नाम पर किया है। अधिकारियों ने बताया कि जिन इंजनों का नामकरण किया गया है वही डब्ल्यूएजी-9 एचसी प्रकार के है और इसका उपयोग आम तौर पर मालगाड़ियों के लिए किया जाता है।
अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि शौर्य चक्र विजेता सुबेदार मेजर शिवाजी कृष्ण घाडगे और अशोक चक्र से सम्मानित मेजर जनरल साइरस ए. पीठावाला के नाम वाले इंजनों का बुधवार को मध्य रेलवे के भुसावल मंडल के देवलाली स्टेशन पर अनावरण किया गया और उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
100 Years of Railway Electrification – Indian Railways’ Tribute to India’s War Heroes
Indian Railways honors two living legends with dedicated locomotives at Devlali, Bhusaval Division, named after:
🪖 Subedar Major Shivaji Krishna Ghadge (Shaurya Chakra)
🪖 Major General Cyrus… pic.twitter.com/OVl00yiOoy— Central Railway (@Central_Railway) March 3, 2025
मध्य रेलवे ने एक विज्ञप्ति में कहा कि ये इंजन भारत के योद्धाओं के लिए एक स्थायी सम्मान के रूप में खड़े हैं, जो उनकी सेवा के लिए राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक हैं। इस समारोह की अध्यक्षता भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना ने की।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि सूबेदार मेजर शिवाजी कृष्ण घाडगे ने 17 मई 2001 को जम्मू-कश्मीर में एक साहसिक हमले का नेतृत्व करते हुए पांच आतंकवादियों को मार गिराया था, जबकि मेजर जनरल साइरस ए. पीठावाला ने गोली लगने के बावजूद 6 जुलाई, 1981 को मणिपुर में एक शीर्ष उग्रवादी को जिंदा पकड़ लिया था।
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भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना ने कार्यक्रम में कहा कि सूबेदार मेजर घाडगे और मेजर जनरल पीठावाला के नाम पर इन इंजनों का नाम रखकर भारतीय रेलवे ने यह सुनिश्चित किया है कि उनकी वीरता की कहानियों का सम्मान जारी रहे और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिले।
(एजेंसी इनपुट के साथ)