रायगढ़ में सबसे ज्यादा वोटर, कोंकण एमएलसी सीट पर भाजपा-एनसीपी के बीच बढ़ी सियासी हलचल
Raigad Key Role Kokan MLC Election: कोंकण विधान परिषद चुनाव में रायगढ़ जिले के सबसे ज्यादा वोटर सियासी समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा और एनसीपी में टिकट को लेकर हलचल तेज हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुनील तटकरे (सौजन्य: फाइल फोटो)
Raigad Key Role Kokan MLC Election News: इस साल कोंकण में रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग मनपा चुनाव क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में रायगड जिले का राजनीतिक वजन निर्णायक होगा, इसके संकेत मिलने लगे हैं।
ड्राफ्ट इलेक्टोरल लिस्ट में तीनों जिलों के कुल 1005 पात्र बोटरों में से 518 वोटर अकेले रायगड जिले से हैं, इसलिए महायुति के नेता और कार्यकर्ता इस बात पर खास ध्यान दे रहे हैं कि क्या भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारी को लेकर कोई नया राजनीतिक प्रयोग करेगी।
खासकर, पनवेल, उरण और पेण चुनाव क्षेत्रों में भाजपा के विधायक के चुने जाने से स्थानीय नेतृत्व पर पार्टी का दावा मजबूत हुआ है। रत्नागिरी जिला अधिकारी और जिला चुनाव अधिकारी मनुज जिंदल ने हाल ही में रायगड-रत्नागिरी- सिंधुदुर्ग लोकल अर्धारिटी चुनाव क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची को घोषणा की।
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इस ड्राफ्ट लिस्ट में नाम शामिल करने या दूसरी आपत्तियां उठाने की आखिरी तारीख 27 मई तक बताई गई है। इस लिस्ट के मुताबिक, तीनों जिलों में कुल योग्य वोटरों की संख्या 1005 है। इसमें रायगड जिले की 7 विधानसभा सीटों के 518 वोटर शामिल हैं।
रत्नागिरी जिले में 274 और सिंधुदुर्ग जिले में 213 वोटर हैं। रायगढ़ जिले के पनवेल में 94, उरण में 32, कर्जत में 110, पेन में 57, अलीबाग में 58, श्रीवर्धन में 115 और महाड में 52 वोटर हैं। इनमें से पनवेल, उरण और पेन विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं, इसलिए माना जा रहा है कि इन तीनों विधानसभा सीटों के कुल 183 वोटरों पर भाजपा का सीधा पॉलिटिकल नियंत्रण है।
अनिकेत तटकरे पर लगे स्थानीय मुद्दे न उठाने के आरोप
- हालांकि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारी की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के सांसद सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत को 2018 से 2024 तक इस सीट से विधान परिषद जाने का मौका दिया गया था। हालांकि, लोकल लेवल पर इस बात की आलोचना हो रही है कि उनके कार्यकाल में विधान परिषद में रायगड, पनवेल या उरण के लोकल मुद्दे असरदार तरीके से नहीं उठाए गए।
- पॉलिटिकल गलियारों में चर्चा है कि अलग-अलग मुद्दे उठाने के बाद लगातार फॉलो-अप का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं है। इस बीच, भाजपा ने पहले वंशवाद के खिलाफ स्टैंड लिया था और अपने विधायक के परिवारों को मनपा चुनावों में उम्मीदवार न देने का निर्देश दिया था। इसलिए भाजपा कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि क्या गठबंधन में सांसद, मंत्री और पूर्व विधायक जैसे राजनीतिक पदों पर एक ही परिवार के होने पर फिर से उसी परिवार को विधान परिषद में उतारा जाएगा।
रायगड, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग तीनों जिलों में भारतीय जनता पार्टी की ताकत बढ़ी है। इसलिए हमने पार्टी नेताओं से उम्मीद जताई है कि कोकण विधान परिषद लोकल बॉडी चुनाव में भाजपा को यह सीट मिलना चाहिए।
– प्रशांत ठाकुर, विधायक पनवेल
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मैं आपको लेजिस्लेचर में उठाए गए सवाली और उन पर हुई कार्रवाई के बारे में बताऊंगा।
– अनिकेत तटकरे, पूर्व विधायक, विधान परिषद
सांसद तटकरे के परिवार ने सीट पर रखा कब्जा
सांसद तटकरे ने हमेशा सता में बड़ी पार्टियों से हाथ मिलाकर इस विधान परिषद की सीट को अपने परिवार के कब्जे में रखा है। इस चुनाव क्षेत्र में रायगड जिले में सबसे ज्यादा वोट होने को देखते हुए, उन्होंने जिले में विधानसभा, नगर निगम, जिला परिषद और पंचायत समिति और ग्राम पंचायत जैसे अलग-अलग चुनावी में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सीटें बाटने में खोसिव रोल निभाने से परहेज किया। इसलिए जिले में मंत्री पद होने के बावजूद एनसीपी पनवेल और उरण इलाकों में आगे नहीं बढ़ पाई।
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भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करेगा टिकट का फैसला
- गठबंधन में किस पार्टी को लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडी की विधान परिषद के लिए नॉमिनेशन मिलेगा, इस पर आखिरी फैसला भाजपा की स्टेट कोर कमेटी और सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड करेगा।
- हालांकि, पार्टी के कुछ पदाधिकारी यह सुझाव दे रहे हैं कि अगर छत्रपति शिवाजी महाराज के रायगढ़ जिले में सबसे ज्यादा वोटर बेस रखने वाली और लोकल लेवल पर एक्टिव नई लीडरशिप को मौका दिया जाए, तो भाजपा रायगड में ऑर्गनाइजेशन ताकत हासिल कर सकती है। इसी वजह से, पनवेल से भाजपा विधायक प्रशांत ठाकुर ने भी पार्टी हाईकमान से उम्मीद जताई है कि यह सीट भाजपा को मिलनी चाहिए।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए मनीष अस्थाना की रिपोर्ट
