Ratnagiri Education Department पर संकट: रत्नागिरी में प्रमुख पद रिक्त, नीतिगत फैसलों में आ रही देर

Ratnagiri Education Department: रत्नागिरी जिले में शिक्षा विभाग प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहा है। प्राथमिक शिक्षणाधिकारी और सात तालुकों में BEO पद खाली होने शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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Ratnagiri Education Society सोर्स ((सोसल मीडिया)
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Ratnagiri Education Department Vacancy Issue: रत्नागिरी जिले के शैक्षणिक पटल पर वर्तमान में 'प्रभारी' राज देखने को मिल रहा है। प्राथमिक शिक्षणाधिकारी नीलिमा नाईक के 30 मार्च को सेवानिवृत्त होने के बाद जिले का मुख्य शैक्षणिक पद एक बार फिर रिक्त हो गया है। यह स्थिति केवल जिला स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पिछले पांच वर्षों से जिले के सात तालुकों में गटशिक्षणाधिकारी (BEO) के पद भी खाली पड़े हैं।

जिले में प्राथमिक शिक्षणाधिकारी पद का खेल पिछले एक साल से जारी है। जून में तत्कालीन अधिकारी बी.एम. कासार के स्थानांतरण के बाद यह पद छह महीने तक खाली रहा। जनवरी में नीलिमा नाईक ने कार्यभार संभाला था, जिससे  प्रशासनिक गति की उम्मीद जगी थी, लेकिन महज चार महीने बाद उनके सेवानिवृत्त होने से विभाग फिर से नेतृत्व विहीन हो गया है।

तालुकों की हालत खस्ता, केवल दो जगहों पर पूर्णकालिक अधिकारी

जिले की स्थिति पर नजर डालें तो 9 में से केवल रत्नागिरी और संगमेश्वर तालुकों में ही पूर्णकालिक गटशिक्षणाधिकारी तैनात हैं। शेष सात तालुकों राजापुर, लांजा, चिपळूण, खेड, मंडणगड, दापोली और गुहागर का कोई वाली-वारिस नहीं है। इन तालुकों में एक ही अधिकारी को दो से तीन पदों का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

नीतिगत निर्णय लेने में आ रही हैं बाधाएं

प्रभारियों के भरोसे काम चलने के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

  • सीमित अधिकार: प्रभारी अधिकारियों को बड़े नीतिगत निर्णय लेने में प्रशासनिक सीमाओं का सामना करना पड़ता है।
  • शिक्षा की गुणवत्ता पर असर: अधिकारियों के पास काम का बोझ अधिक होने के कारण वे स्कूलों की गुणवत्ता और शैक्षणिक विकास पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
  • प्रशासनिक विलंब: शिक्षकों को अपने तबादलों, पदोन्नति और अन्य विभागीय कार्यों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

विशेष अभियान चलाने की मांग

शिक्षा विभाग की इस बदहाली को देखते हुए अब स्थानीय स्तर पर मांग जोर पकड़ रही है कि सरकार इन रिक्त पदों को भरने के लिए एक विशेष अभियान चलाए। शिक्षा प्रेमियों और शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही पूर्णकालिक नियुक्तियां नहीं की गईं, तो जिले की शैक्षणिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

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