पुणे में जलकुंभी हटाने पर खर्च को लेकर विवाद, 16.61 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा; मनपा पर उठे सवाल
Pune Water Hyacinth: पुणे में जलकुंभी हटाने पर 16.61 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी जलाशयों की स्थिति बदतर है। पूर्व नेताओं ने मनपा के दावों को चुनौती देते हुए बड़े घोटाले का आरोप लगाया है।
- Written By: रूपम सिंह
जलकुंभी सफाई (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Water Hyacinth Khadakwasla Dam: पुणे की मुला-मुठा नदी, पाषाण झील, कात्रज तालाब और जांभूलवाडी जलाशय सहित शहर के विभिन्न जल स्रोतों से जलकुंभी हटाने के लिए किए गए खर्च को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व विपक्षी नेता उज्ज्वल केसकर, सुहास कुलकर्णी और पूर्व नगरसेवक प्रशांत बधे ने पुणे महानगर पालिका (मनपा) के दावों पर सवाल उठाते हुए इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर गंभीर शंकाएं जताई हैं।
नेताओं का दावा है कि पिछले चार वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष को मिलाकर जलकुंभी हटाने के कार्य पर लगभग 16.61 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जबकि मनपा प्रशासन ने सदन में दिए गए लिखित उत्तर में इस खर्च को केवल 7.97 करोड़ रुपये बताया था। खर्च के आंकड़ों में सामने आए इस बड़े अंतर को लेकर विपक्ष ने प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद पुणे शहर के जलाशयों और नदी क्षेत्रों में जलकुंभी की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि मुला-मुठा नदी के कई हिस्सों में आज भी जलकुंभी का व्यापक फैलाव देखा जा सकता है। विशेष रूप से वारजे पुल से खडकवासला की ओर जाने वाले मार्ग पर नदी का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ नजर आता है, जिससे सफाई कार्यों की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बाढ़ अथवा तेज जलप्रवाह के दौरान जलकुंभी स्वाभाविक रूप से बह जाती है, जबकि शहर के मध्य क्षेत्रों में जमा होने पर उसका सीमित स्तर पर निष्कासन किया जाता है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर खर्च दिखाया जाना संदेह पैदा करता है। नेताओं का कहना है कि यदि नियमित और प्रभावी सफाई कार्य किए गए होते, तो जलकुंभी की समस्या इतनी गंभीर नहीं रहती।
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16.61 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा; मनपा पर उठे सवाल
मामले में एक ही ठेकेदार को लगातार काम दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से जलकुंभी हटाने का ठेका एक ही एजेंसी को दिया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा खर्च और कार्यों का ऑडिट कराने की मांग की है।
दूसरी ओर, मनपा प्रशासन का कहना है कि जलकुंभी हटाने का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है और विभिन्न जलाशयों में सफाई अभियान चलाए जाते हैं। हालांकि विपक्ष के आरोपों के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है और अब जलकुंभी निष्कासन पर हुए खर्च तथा उसकी वास्तविक उपलब्धियों को लेकर बहस तेज हो गई है।
