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Pune Waste Management: हर दिन निकल रहा 2,700 टन वेस्ट, मनपा ने 27 प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स से संभाला मोर्चा

Pune Waste Management: पुणे में रोज 2,700 टन कचरा निकल रहा है। मनपा 27 परियोजनाओं के जरिए बायोगैस, खाद और आरडीएफ ईंधन बनाकर इस कचरे का वैज्ञानिक निपटान करने की कोशिशों में जुटी है।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: Jun 20, 2026 | 01:59 PM

पुणे में कचरा संकट (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

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 Solid Waste Management Pmc Garbage Crisis: पुणे शहर का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है, उसी रफ्तार से यहां की आबादी और उससे उत्पन्न होने वाले कचरे का संकट भी गहराता जा रहा है। वर्तमान में पुणे में प्रतिदिन लगभग 2,700 टन कचरा उत्पन्न हो रहा है, जो शहर की बढ़ती आवासीय और व्यवसायिक गतिविधियों का सीधा परिणाम है।

इस भारी-भरकम कचरे के वैज्ञानिक निपटान को लेकर पुणे मनपा अपनी तरफ से कई बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर बढ़ती जा रही कचरे की मात्रा ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। महानगरपालिका का दावा है कि वह उत्पन्न होने वाले कुल कचरे में से करीब 2,200 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर रही है, जबकि शेष कचरे को अन्य माध्यमों से निपटाया जा रहा है।

इस कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए पूरे शहर में फिलहाल 27 कचरा प्रसंस्करण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। महापालिका के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इन 27 परियोजनाओं में से 14 परियोजनाएं विशेष रूप से गीले कचरे के प्रसंस्करण के लिए हैं और 13 परियोजनाएं सूखे कचरे के प्रबंधन के लिए समर्पित हैं। इन केंद्रों के जरिए हर दिन लगभग 1,700 टन सूखे कचरे और 450 से 500 टन गीले कचरे पर विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत काम किया जाता है।

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बायोगैस और कंपोस्ट खाद की जा रही तैयार

घरों, सब्जी मंडियों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले गीले कचरे को पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों में बदलने का प्रयास किया जाता है। इस गीले कचरे का उपयोग करके बायोगैस और कंपोस्ट खाद तैयार की जा रही है। उत्पादित होने वाली बायोगैस का इस्तेमाल ऊर्जा और बिजली बनाने में होता है, जबकि कंपोस्ट खाद किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में एक बेहतरीन जैविक विकल्प साबित हो रही है।

RDF नामक विशेष ईंधन होता है तैयार

  • दूसरी ओर, सूखे कचरे को अलग-अलग स्तर पर छांटने के बाद उसकी रीसाइक्लिंग यानी पुनर्चक्रण की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
  • इस सूखे कचरे में से जो हिस्सा दोबारा इस्तेमाल या रीसायकल करने योग्य नहीं होता, उससे रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) नामक एक विशेष ईंधन तैयार किया जाता है।
  • इस आरडीएफ ईंधन को विभिन्न सीमेंट उद्योगों को उनके कारखानों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
  • इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य लैंडफिल साइट्स पर कचरे के भारी दबाव को कम करना और कचरे से अधिक से अधिक ऊर्जा प्राप्त करना है।
  • इन परियोजनाओं के अलावा, महापालिका हर दिन लगभग 500 से 600 टन जैविक कचरा सीधे तौर पर पिट कंपोस्टिंग के लिए स्थानीय किसानों को भी सौंप रही है, ताकि खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

ये भी पढ़ें:- कात्रज-कोंढवा मार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव, फ्लाईओवर कार्य के चलते लागू किए गए नए नियम

127 कॉम्पैक्टर वाहन तैनात

कचरे के इस बढ़ते संकट से निपटने और उसकी संग्रह व परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए महापालिका बुनियादी ढांचे में सुधार के प्रयास भी कर रही है। मौजूदा समय में पुणे शहर के भीतर कचरा उठाने और उसे ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाने के लिए 93 बिन रिसोर्स सेंटर (बीआरसी), 6 बड़े हुक लोडर और लगभग 127 अत्याधुनिक कॉम्पैक्टर वाहन तैनात किए गए हैं।

इसके साथ ही, कचरा हस्तांतरण केंद्रों (ट्रांसफर स्टेशनों) को आधुनिक और पूरी तरह से यांत्रिक बनाने का काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के तहत हड़पसर और घोले रोड स्थित बड़े ट्रांसफर स्टेशनों के आधुनिकीकरण का काम फिलहाल प्रगति पर है।

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Published On: Jun 20, 2026 | 01:51 PM

Topics:  

  • Maharashtra News
  • Pune News
  • Solid Waste Management

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