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मुंढे इफेक्ट का देशव्यापी असर! महाराष्ट्र के तुकाराम की सख्ती देख अन्य राज्यों में भी मिलावटखोरों पर शिकंजा

Food Adulteration Action: महाराष्ट्र में IAS तुकाराम मुंढे के कड़े फैसलों और कार्रवाई का असर अब देशभर में दिख रहा है। उनकी तर्ज पर अब अन्य राज्यों का FDA प्रशासन भी एक्शन में है।

  • Written By: गोरक्ष पोफली
Updated On: Aug 08, 2026 | 11:10 PM

तुकाराम मुंढे (सोर्स: एआई फोटो)

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Tukaram Mundhe Effect FDA Action: महाराष्ट्र में अन्न और औषध प्रशासन के आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंढे की नियुक्ति क्या हुई, मानो मिलावटखोरों के लिए शामत आ गई। अपने कड़क अंदाज और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए मशहूर 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र में जो मुहिम छेड़ी है, उसकी गूंज अब पूरे भारत में सुनाई दे रही है।

आलम यह है कि महाराष्ट्र के इस सिंघम के डर और उनके काम से मिली प्रेरणा या कहें कि प्रशासनिक FOMO की वजह से अन्य राज्यों के FDA विभाग भी अब नींद से जाग गए हैं और बड़े-बड़े ब्रांड्स पर नकेल कसनी शुरू कर दी है।

न मिलावटी खाऊंगा, न खिलाने दूंगा

प्रधानमंत्री के प्रसिद्ध नारे की तर्ज पर तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट संदेश दिया है, न मिलावटी खाऊंगा, न खाने दूंगा और न खिलाने दूंगा। कार्यभार संभालने के महज दो महीनों के भीतर उन्होंने महाराष्ट्र में 1,100 से अधिक छापेमारी की और ₹49.57 करोड़ से अधिक का मिलावटी सामान जब्त किया।

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उन्होंने न केवल छोटे मिलावटखोरों पर हाथ डाला, बल्कि नूर मोहम्मदी, पारसी डेयरी फार्म और के. रुस्तम जैसे दशकों पुराने और नामी संस्थानों के लाइसेंस तक निलंबित कर दिए, जिससे उद्योग जगत में हड़कंप मच गया।

महाराष्ट्र बना रोल मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि तुकाराम मुंढे ने पूरे देश के लिए एक नजीर पेश की है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो मौजूदा कानून ही मिलावटखोरी रोकने के लिए पर्याप्त हैं। उनके इस एक्शन मोड को देखकर अन्य राज्यों के प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।

हाल ही में FSSAI ने ओल्ड मंक, मैकडॉवेल्स और रॉयल चैलेंज जैसे बड़े शराब ब्रांडों के खिलाफ भ्रामक लेबलिंग और फ्लेवर को लेकर कड़ी कार्रवाई की है। वहीं, कर्नाटक सरकार ने भी दवाओं की गुणवत्ता और नशीले पदार्थों की बिक्री पर नजर रखने के लिए देश का पहला एकीकृत पोर्टल लॉन्च किया है।

बड़े ब्रांड्स और सरकारी संस्थान भी निशाने पर

मुंढे की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी का वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं करते। उन्होंने न केवल निजी होटलों, बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट की कैंटीन और मंत्रालय की कैंटीन तक में छापेमारी कर स्वच्छता और मानकों की जांच की।

इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाकर यह स्पष्ट कर दिया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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कामचोर अफसरों को दो टूक

मुंढे ने केवल बाहर ही नहीं, बल्कि अन्न और औषध प्रशासन विभाग के भीतर भी सफाई अभियान चलाया है। उन्होंने प्रयोगशालाओं को दो शिफ्टों में चलाने का आदेश दिया ताकि नमूनों की जांच तेजी से हो सके। जब अधिकारियों ने ज्यादा काम की शिकायत की, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन्हें सरकारी नियमों के अनुसार काम करना मंजूर नहीं है, वे इस्तीफा देकर घर जा सकते हैं।

उनके इस सख्त रवैये का नतीजा है कि जहां पहले साल भर में 15,000 सैंपल चेक होते थे, वहीं अब महज 15 दिनों में ही हजारों सैंपल्स की टेस्टिंग की जा रही है।

आज तुकाराम मुंढे की वजह से न केवल महाराष्ट्र, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी जनता के बीच यह भरोसा जगा है कि शुद्ध खाना उनका संवैधानिक अधिकार है। यह मुंढे इफेक्ट ही है कि अब मिलावटखोरों को केवल छापे का ही नहीं, बल्कि सिंघम के उस कानून के डंडे का डर है जो बिना किसी भेदभाव के चलता है।

Tukaram mundhe effect fda action against food adulteration across states

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Published On: Aug 08, 2026 | 11:10 PM

Topics:  

  • Food and Drug Administration
  • Maharashtra News
  • Mumbai News
  • Tukaram Mundhe

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