Supriya Sule on Ajit Pawar Dreams (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Supriya Sule on Ajit Pawar: उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और पवार परिवार में उपजे शून्य के बीच सुप्रिया सुले का एक भावुक और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि अजित दादा के अधूरे सपनों को पूरा करना अब उनकी और परिवार की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद से उनका पूरा परिवार एक अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है।
सुप्रिया सुले के इस बयान को राज्य की राजनीति में दोनों एनसीपी गुटों के बीच जमी बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि अजित पवार के निधन के बाद अब राजनीतिक मतभेदों या पुरानी कड़वाहटों को याद करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा, “दादा अब हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए मैं पुरानी बातों को दोबारा नहीं दोहराना चाहती। हमारे बीच जो भी चर्चाएं हुईं, वे हमारे निजी रिश्ते का हिस्सा थीं और हमारे बीच ही रहेंगी।” सुले ने भावुक होते हुए कहा कि दादा के जाने से जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई करना असंभव है, लेकिन उनके विजन और सपनों को आगे ले जाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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जब सुप्रिया सुले से दोनों एनसीपी गुटों के विलय (Merger) की चर्चाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब देने के बजाय परिवार की एकजुटता पर जोर दिया।
मुश्किल घड़ी: उन्होंने कहा, “परिवार एक बहुत ही मुश्किल समय से गुजर रहा है। हम सभी एक-दूसरे का सहारा बन रहे हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।”
नैतिक जिम्मेदारी: सुले ने बार-बार इस बात को दोहराया कि अजित पवार का महाराष्ट्र के विकास के लिए एक विशेष दृष्टिकोण था, जिसे पूरा करना अब परिवार और कार्यकर्ताओं का सामूहिक दायित्व है।
28 जनवरी को हुए विमान हादसे ने न केवल महायुति सरकार के समीकरण बदल दिए, बल्कि पवार परिवार के भीतर के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित किया है। अजित पवार के निधन के बाद से उनके गुट के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें अब शरद पवार की ओर टिकी हैं। सुप्रिया सुले का यह बयान कि वे दादा के सपनों को पूरा करेंगी, उन कार्यकर्ताओं को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है जो अजित पवार के जाने के बाद खुद को नेतृत्वहीन महसूस कर रहे हैं। फिलहाल, पूरा महाराष्ट्र यह देख रहा है कि अजित पवार की विरासत को आगे ले जाने में सुप्रिया सुले और शरद पवार की क्या भूमिका रहती है।