Syed Iqbal Shiv Sena UBT Mayor (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
BJP vs Uddhav Thackeray Hindutva: महाराष्ट्र के परभणी नगर निगम (Parbhani Municipal Corporation) के मेयर चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘वोट बैंक’ की बहस को एक बार फिर चरम पर पहुँचा दिया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए सैय्यद इकबाल को मेयर पद की कुर्सी सौंपी है। कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थन से मिली इस जीत ने जहाँ महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर तालमेल को साबित किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी को उद्धव ठाकरे की विचारधारा पर तीखे सवाल उठाने का मौका दे दिया है।
बीजेपी ने इस चुनाव को उद्धव ठाकरे के ‘बदलते हिंदुत्व’ का प्रमाण बताते हुए राज्यव्यापी हमले की रणनीति तैयार कर ली है।
परभणी मेयर चुनाव में महाविकास अघाड़ी का गणित पूरी तरह सटीक बैठा। सैय्यद इकबाल को कुल 39 वोट मिले, जबकि बीजेपी की उम्मीदवार तिरुमाला खिल्लारे महज 26 वोटों पर सिमट गईं।
समर्थन का गणित: इकबाल को शिवसेना (UBT) के 25, कांग्रेस के 12, एनसीपी (SP) के 1 और एक निर्दलीय पार्षद का साथ मिला।
गठबंधन धर्म: मेयर पद उद्धव गुट को मिला, तो डिप्टी मेयर पद पर कांग्रेस के गणेश देशमुख ने 37 वोटों के साथ जीत दर्ज की।
बीजेपी की हार: बीजेपी ने सत्ता हथियाने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन विपक्षी एकजुटता के सामने उनकी रणनीति नाकाम साबित हुई।
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सैय्यद इकबाल के मेयर बनते ही बीजेपी ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सत्ता की मलाई चाटने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे के उन सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है, जिसमें वे ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति के कट्टर विरोधी थे। बीजेपी का कहना है कि पालघर साधु हत्याकांड पर चुप रहने वाले और अब मुस्लिम मेयर बनाने वाले उद्धव का हिंदुत्व केवल ‘नाममात्र’ का रह गया है। बीजेपी इस मुद्दे को अब आने वाले स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों में उद्धव गुट के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाली है।
विवाद बढ़ता देख शिवसेना (UBT) ने भी अपनी सफाई पेश की है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि सैय्यद इकबाल एक निष्ठावान शिवसैनिक हैं और परभणी के विकास के लिए उनका चुनाव किया गया है। उद्धव गुट का तर्क है कि बीजेपी केवल धार्मिक ध्रुवीकरण कर अपनी हार को छिपाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परभणी का यह परिणाम मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना (UBT) के पारंपरिक मतदाता आधार (कैडर) के भीतर एक नई बहस छेड़ सकता है, जिससे निपटना उद्धव ठाकरे के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती होगी।