Maharashtra News: शिरूर में दिग्गज बनाम नए चेहरे, चुनावी तापमान चरम पर
Talegaon Dhamdhere जिला परिषद गट में भाजपा, राकां के दोनों गुट और शिवसेना यूबीटी के बीच चौरंगी मुकाबले के संकेत हैं। टिकट बंटवारे और दिग्गज नेताओं की भूमिका ने चुनाव रोचक बना दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
Shirur News In Hindi: शिरूर तहसील के तलेगांव ढमढेरे जिला परिषद गट में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहां इस बार स्थापित दिग्गजों और नए चेहरों के बीच एक भीषण ‘चौरंगी’ संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं।
मनपा चुनाव के बाद बदले हुए समीकरणों के बीच राकां (शरद गुट), राकां (अजीत गुट), भाजपा और शिवसेना (उद्धव गुट) के बीच कड़ी स्पर्धा देखी जा रही है।
शरद गुट से सारिका राहुल करपे का नाम सबसे आगे चल रहा है, जबकि भाजपा के भीतर दीपाली राहुल गव्हाणे और रेश्मा जयेश शिंदे के बीच उम्मीदवारी को लेकर आंतरिक प्रतिस्पर्धा तेज है।
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वहीं, अजित पवार गुट की ओर से रेखा मंगलदास बांदल ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और शिवसेना (यूबीटी) ने चेतना जयकुमार ढमढेरे के नाम के साथ इस मुकाबले को और अधिक गंभीर बना दिया है। क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी और विभिन्न दलों में बढ़ती आंतरिक प्रतिस्पर्धा ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
दिग्गज नेताओं के फैसले पर टिका राजनीतिक समीकरण
तलेगांव ढमढेरे गुट राजनीतिक रूप से काफ प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यहां से कई दिग्गज नेता जिला और तहसील स्तर पर सक्रिय हैं। इनन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरविंद ढमढेरे, शरद गुट के बालासाहेब नरके, विश्वास ढमढेरे, और भाजपा के शिवाजीराव भुजबल जैसे नाम शामिल हैं।
ये सभी नेता जिले की राजनीति में बड़ा दखल रखते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दिग्गज नेता किसे अपना समर्थन देते हैं या स्वयं चुनावी मैदान में उतरते हैं, क्योंकि इनका निर्णय क्षेत्र के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल सकता है।
सभी दलों के समक्ष बगावत की चुनौती
- वहीं राजनीतिक दलों के भीतर ‘बगावत’ का डर भी बढ़ने लगा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों और भाजपा में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लंबी सूची होने के कारण टिकट वितरण पक्षश्रेष्ठी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
- यदि किसी एक को टिकट मिलता है, तो दूसरे इच्छुक उम्मीदवार द्वारा बगावत करने की प्रबल संभावना है। वोटों के विभाजन को रोकने के लिए वरिष्ठ नेताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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उम्मीदवारों के बीच बढ़ी बेचैनी
यह लड़ाई एक सीट की नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है, जिससे पूरे शिरूर तहसील का ध्यान इस ओर आकर्षित हो गया है। अगले कुछ दिनों में उम्मीदवारों के नाम तय होने के साथ ही तस्वीर साफ हो जाएगी। तलेगांव ढमढेरे के मतदाताओं ने अभी तक अपने पते नहीं खोले है, जिससे उम्मीदवारों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। अंततः जनता का फैसला और बड़े नेताओं की एकजुटता ही इस चौरंगी मुकाचले के विजेता का निर्धारण करेगी।
