मछुआरों के विरोध से अटकी जलमार्ग परियोजना, वसई-उत्तन नौका सेवा की तैयारी
Mira Bhayandar Vasai Ferry Service: भाईंदर और वसई के बीच जलमार्ग परिवहन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने उत्तन के चौक बंदरगाह पर नया यात्री घाट बनाने की योजना बनाई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
वसई उत्तन वॉटर ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Vasai Uttan Water Transport Project: भाईंदर और वसई के बीच यात्रा को तेज, आसान और सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई जलमार्ग परिवहन योजना अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
प्रशासन ने वसई से उत्तन तक यात्री नौका सेवा शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तन के चौक बंदरगाह पर आधुनिक यात्री घाट (जेट्टी) बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को स्थानीय मछुआरों के विरोध के कारण फिलहाल धीमी गति का सामना करना पड़ रहा है।
उल्हास नदी से अलग हुए दो शहर, जलमार्ग बनेगा नया सेतु
मीरा-भाईंदर और वसई-विरार शहरों के बीच बहने वाली उल्हास नदी इन दोनों क्षेत्रों को भौगोलिक रूप से अलग करती है। नदी का तल इस क्षेत्र में काफी चौड़ा होने के कारण दोनों शहरों के बीच सीधा संपर्क सीमित है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार रेल और सड़क परिवहन के साथ-साथ जलमार्ग को भी मजबूत बनाने की योजना पर काम कर रही है। करीब दो वर्ष पहले भाईंदर से वसई जलमार्ग से आने-जाने के लिए रो-रो सेवा का उद्घाटन 20 फरवरी 2024 को तत्कालीन सांसद राजन विचारे के हाथों भाईंदर पश्चिम के जेट्टी पर संपन्न हुआ था।
30 करोड़ की लागत से बनेगा नया घाट
- इस परियोजना को साकार करने के लिए प्रशासन ने उत्तान के चौक बंदरगाह पर यात्री नौकाओं के लिए एक नया घाट बनाने की योजना तैयार की है। इस कार्य के लिए लगभग 30 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।
- परियोजना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन ने घाट निर्माण से पहले आवश्यक मिट्टी परीक्षण (सोइल टेस्टिंग) भी शुरू कर दी है।
मछुआरों की चिंता बनी बड़ी चुनौती
हालांकि, यह परियोजना स्थानीय मछुआरों के लिए चिंता का विषय बन गई है। उत्तन का चौक बंदरगाह पर्वत श्रृंखला से सटा हुआ एक सुरक्षित स्थान माना जाता है, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान उत्तन क्षेत्र की लगभग 700 मछली पकड़ने वाली नावे इसी बंदरगाह में लंगर डालती मछुआरों का कहना है कि यदि यहां यात्री घाट बनाया गया तो नावों को खड़ा करने और संचालन में भारी कठिनाई हो सकती है। इसी कारण वे घाट के स्थान को बदलने की मांग कर रहे हैं।
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समाधान के लिए जारी हैं बैठकें
स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि विकास परियोजना और मछुआरों की आजीविका, दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। स्थानीय नगरसेविका शर्मिला बगाजी गंडोली के अनुसार मछुआरों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और साथ ही यात्री नौका सेवा भी शुरू हो सके, इसके लिए सभी पक्षों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
