Pune News: पिंपरी-चिंचवड़ में बड़ा उलटफेर, 84 सीटों के साथ भाजपा सबसे आगे

Maharashtra Local Body Elections: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा चुनाव में मतदाताओं ने कई दिग्गज नेताओं को नकार दिया। भाजपा ने 84 सीटों के साथ दबदबा बनाया, जबकि दलबदलुओं को मिला-जुला जनादेश मिला।
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पुणे न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
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Pimpri Chinchwad News In Hindi: पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका के चुनाव परिणामों ने शहर की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मतदाताओं ने कई दिग्गज चेहरों को नकार दिया, जबकि पाला बदलने वाले 'आयाराम-गयाराम' नेताओं के प्रति मिला-जुला रुख अपनाया।

चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए 84 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट) को 37 सीटों से संतोष करना पड़ा।

शिवसेना (शिंदे गुट) ने 6 सीटें जीतीं और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। 128 सीटों में से 2 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, जिसके कारण प्रभावी रूप से 126 सीटों पर ही मुकाबला हुआ।

कद्दावार नेताओं को मिली हार

इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाले परिणाम भाजपा के भीतर से आए, जहां पूर्व महापौर उषा ढोरे, उपमहापौर सचिन चिंचवड़े और सदन के पूर्व नेता नामदेव ढाके जैसे कद्दावर नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। इनके अलावा, संतोष लोंढे जैसे अनुभवी नेताओं को भी जनता ने घर बिठा दिया। दूसरी ओर पूर्व महापौर शकुंतला धराडे और पूर्व विपक्ष नेता सुलभा उबाले अपनी सीटें बचाने में सफल रहीं और एक बार फिर सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

28 दलबदलुओं की जीत

इस बार 39 नेताओं ने चुनाव से पहले पार्टियां बदली थीं, जिनमें से 28 ने जीत हासिल की। जालिंदर शिंदे, कुशाग्र कदम, विनोद नढे, राहुल कलाटे, रवि लांडगे, अमित गावडे, भीमाबाई फुगे, शेखर चिंचवड़े और संदीप वाघेरे विजयी रहे। दलबदल करने वाले 11 को हार का स्वाद भी चखना पड़ा।

सांसद-विधायक के बेटे बने नगरसेवक

शहराध्यक्षों की साख की बात करें तो राष्ट्रवादी के योगेश बहल, भाजपा के शत्रुघ्न काटे और शिवसेना (शिंदे) के नीलेश तरस अपनी जीत दर्ज करने में सफल रहे, लेकिन मनसे के सचिन चिखले और आप के रविराज काले को पराजय मिली। पारिवारिक राजनीति के मोर्चे पर मतदाताओं ने कड़ा रुख अपनाया।

कई पति पत्नी की जोड़ियों को हार का सामना करना पड़ा, जैसे सचिन और अश्विनी चिखले की जोड़ी तथा मोरेश्वर और जयश्री भोंडवे की जोड़ी। लेकिन सांसदों और विधायकों के परिजनों के लिए यह चुनाव सुखद रहा, सांसद श्रीरंग बारणे के पुत्र विश्वजीत बारणे और विधायक सिद्धार्थ बनसोडे पहली बार नगरसेवक के रूप में सदन पहुंचे है।

कुल मिलाकर, इन चुनाव परिणामों ने साबित किया है कि केवल पद या दलबदल जीत की गारंटी नहीं है, बल्कि जनता का विश्वास जीतना सबसे महत्वपूर्ण है।

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