वीर सावरकर ने अंग्रेजों से 5 बार मांगी थी माफी, परपोते सत्यकी का पुणे की कोर्ट में बड़ा कबूलनामा
Savarkar Case Pune Court: पुणे की विशेष अदालत में सावरकर से जुड़े मानहानि मामले में उनके परपोते ने अहम बयान दिया। दया याचिकाओं, ब्रिटिश सेना में भर्ती अपील और विचारों को लेकर कई तथ्य सामने आए।
- Written By: अपूर्वा नायक
स्वातंत्र्यवीर सावरकर (सौ. सोशल मीडिया )
Savarkar Case Pune Court Mercy Petitions: विनायक दामोदर सावरकर के परपोते ने पुणे में विशेष अदालत को बताया कि सावरकर ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार के समक्ष पांच दया याचिकाएं दायर की थीं और ब्रिटिश प्रशासन में भर्ती होने की अपील की थी।
ये बयान सत्यकी सावरकर ने अधिवक्ता मिलिंद पवार द्वारा की गई जिरह के दौरान दिए थे, जो सावरकर पर कथित टिप्पणियों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह सच है कि सावरकर ने सेलुलर जेल में रहते हुए पांच बार दया याचिकाएं दायर की थीं।
ब्रिटिश सरकार को याचिकाएं भेजने की बात स्वीकारी
न केवल वीर सावरकर बल्कि कई राजनीतिक कैदियों ने ब्रिटिश सरकार को इसी तरह की याचिकाएं भेजी थीं। यह कहना सही नहीं है कि कुछ इतिहासकारों के अनुसार, सावरकर पर दो-राष्ट्र अवधारणा का प्रस्ताव रखने का आरोप है। सावरकर ने दो-राष्ट्र विवाद के बारे में तथ्यात्मक टिप्पणियां की थीं, लेकिन मूल अवधारणा उनकी नहीं थी।
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गाय को मानते थे उपभोग की वस्तु
गवाही के दौरान सत्यकी सावरकर ने यह भी कहा कि सावरकर ने गाय को कभी भगवान नहीं कहा, बल्कि एक उपयोगी जानवर बताया। उन्होंने यह भी बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सावरकर ने ब्रिटिश सेना में भर्ती के लिए अपील की थी, और उन्होंने उस घटना का संदर्भ भी समझाया। उन्होंने कहा, यह कहना सही नहीं है कि सावरकर पर ब्रिटिश सेना में भर्ती के लिए अपील करने का आरोप लगाया गया था।।
