

Bombay High Court: स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के दादर स्थित निवास स्थान ‘सावरकर सदन’ को वास्तु विरासत स्थल का दर्जा दिए जाने योग्य बताते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शुक्रवार को मुंबई उच्च न्यायालय में शपथपत्र दाखिल किया।
एएसआई ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट किया है कि यह इमारत राज्य संरक्षित स्मारक अथवा नगरपालिका विरासत स्थलों की सूची में शामिल किए जाने योग्य है। यह शपथपत्र अभिनव भारत कांग्रेस के पंकज फडणीस द्वारा दायर जनहित याचिका पर दाखिल किया गया है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
सावरकर सदन वर्ष 1938 में निर्मित दो मंजिला इमारत है, जहां वीर सावरकर 1966 में अपने निधन तक निवासरत रहे। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है, जहां सावरकर ने सुभाष चंद्र बोस सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकों और विचार-विमर्श में भाग लिया था।
एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही इस इमारत को केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए राज्य सरकार या महानगरपालिका द्वारा इसका संरक्षण किया जाना आवश्यक है।
वर्तमान में सावरकर सदन के भूतल पर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट द्वारा एक कक्ष को मिनी संग्रहालय के रूप में संचालित किया जा रहा है, जहां सावरकर के जीवन और कार्यों से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित की गई है।