
पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: पुणे जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का अंतिम दिन जिले की राजनीति में बड़े उलटफेर लेकर आया।
बुधवार को नामांकन के आखिरी घंटों तक चली खींचतान में कहीं वर्षों पुराने गठबंधन जमींदोज हो गए, तो कहीं चिर-प्रतिद्वंद्वी एक मंच पर नजर आए। टिकट बंटवारे को लेकर मची गहमागहमी के बीच कई दिग्गजों का पत्ता कट गया, जिससे नाराज उम्मीदवारों ने पार्टी निष्ठा को किनारे रख पाला बदलते हुए दूसरे दलों से पर्चा भर दिया।
पूरे जिले की निगाहें बारामती तहसील पर टिकी थीं। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भाजपा के साथ गठबंधन धर्म निभाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के कारण भाजपा ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए।
देर रात तक चली इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आधिकारिक तौर पर किसे मौका मिला और कौन रेस से बाहर हुआ। शिरूर तहसील में स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण रही। यहां ए-बी फॉर्म के वितरण में हुई देरी के कारण उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और जमकर हंगामा हुआ।
तनाव इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए स्थिति अनियंत्रित हो गई। महापालिका चुनावों के कड़वे अनुभवों को – देखते हुए इस बार अधिकांश दलों ने अंतिम समय तक ए-बी फॉर्म रोके रखे, जिससे उम्मीदवारों में भारी असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी रही।
नामांकन के अंतिम दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों (अजीत पवार और शरद पवार) के बीच ‘मनमिलन’ की चर्चाएं भी बेअसर साबित हुई। मुलशी तालुका में स्थिति स्पष्ट हो गई, जहां दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए हैं। पुरंदर में भाजपा और शिंदे गुट का गठबंधन टूट गया, जिसका फायदा उठाते हुए शिंदे गुट के तालुका अध्यक्ष हरिभाऊ लोले ने ऐन वक्त पर भाजपा का दामन थाम लिया।
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जहां एक ओर पूरे जिले में बगावत और टूट का दौर था, वहीं इंदापुर तहसील में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहाँ कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल और अप्पासाहेब जगदाले के बीच सीटों का सफल तालमेल हो गया।






