पुणे ZP का बड़ा फैसला, एक ठेकेदार को अब एक समय में सिर्फ 4 काम ही मिलेंगे
Pune जिला परिषद ने विकास कार्यों में देरी रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब कोई भी ठेकेदार एक साथ चार से अधिक काम नहीं ले सकेगा। फर्ज़ी दस्तावेज़ पर अयोग्यता और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई होगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: जिला परिषद (ZP) प्रशासन ने अंततः ठेकेदारों की मनमानी और काम में दिलाई पर लगाम लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण और कड़ा कदम उठाया है। विभिन्न विभागों में कुछ ठेकेदारों के पास बड़ी संख्या में काम जमा होने से विकास कार्यों की गति धीमी पड़ रही थी।
गुणवता से समझौता हो रहा था और फंड की कमी के कारण कार्य अटके पड़े थे, जिसकी शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में, जेडपी ने निर्णय लिया है कि अब एक ठेकेदार को ओपन टेंडर में एक समय में चार से अधिक कार्य आवंटित नहीं किए जाएंगे।
प्रशासन का मानना है कि इस कदम से विकास कार्यों को निश्चित गति मिलेगी, कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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पिछले कुछ महीनों से ग्रामीण निर्माण, जल आपूर्ति, सड़क मरम्मत और स्कूल मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगातार देरी होने की शिकायत पुणे जिला परिषद प्रशासन को मिल रही थीं। कुछ ठेकेदारों ने जानबूझकर बड़ी परियोजनाओं को ‘ब्लॉक’ करके रखा था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम को गति नहीं मिल रही थी।
टेंडर क्षमता और दस्तावेजों की जांच हुई अनिवार्य
- जल संसाधन, जल आपूर्ति और निर्माण विभागों ने इस पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया था। इस ‘श्रृंखला’ को तोड़ने के लिए, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गजानन पाटिल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और यह निर्णायक कदम उठाया।
- नए निगमों के तहत, ठेकेदारों के लिए ई-निविदा विज्ञापन में काम भरते समय अपनी निविदा क्षमता को पूरी तरह से जांचने के लिए ‘वर्क डन प्रमाणपत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
चार से अधिक लंबित काम, तो होंगे अयोग्य
इसका अर्थ है कि ठेकेदार को यह साबित करना होगा कि उन्होंने पहले काम पूरा कर लिया है, तभी वे निविदा प्रक्रिया में भाग ले पाएंगे। इसके अलावा, सनदी लेखापाल (CA) द्वारा प्रमाणित ‘कार्य करने की क्षमता का प्रमाण पत्र’ ही मान्य होगा।
यदि प्रस्तुत दस्तावेजों में कोई त्रुटि पाई जाती है या वे जाली साबित होते हैं, तो ठेकेदार को बिना किसी पूर्व सूचना के निविदा प्रक्रिया से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा और साथ ही, संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि संबंधित शिक्षित बेरोजगार इंजीनियर या स्वीकृत संस्था के ठेकेदार के पास पहले से स्वीकृत कार्यों में से चार या चार से अधिक कार्य अपूर्ण या लंबित हैं, तो ऐसी स्थिति में उन्हें अगली सूची के कार्य देने के लिए अयोग्य ठहराने का अंतिम निर्णय निविदा समिति का होगा।
इसके अतिरिक्त, एक स्वीकृत संस्था या शिक्षित बेरोजगार इंजीनियर को एक वर्ष में केवल 1 करोड़ रुपये तक के ही कार्य दिए जाएंगे। यह शर्त उन कार्यों पर भी लागू होगी जिनकी निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पारदर्शिता को बढ़ाने वाले निर्णय से ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
ठेकेदारों ने खुद ही शुरू कर दिया है ‘धंधा’
अनुमोदित संस्था के नाम पर ठेकेदारों से काम लिया जाता है। इन कामों को अपने ठेकेदारों तक पहुंचाने के लिए ‘सफेदपोश’ दलालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ ठेकेदारों ने इन कामों को उय ठेकेदारों को देकर करवाने का गोरखधंधा शुरू कर दिया है।
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इससे कामों की गुणवत्ता में भारी अंतर आ रहा है। जिता परिषद में लगातार शिकायते बढ़ रही है कि काम की गुणवता प्रभावित हो रही है और विकास कार्य घटिया स्तर के हो रहे है। नागरिको की मांग है कि प्रशासन इस पर गंभीरता से ध्यान दे और इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई करे।
