पुणे मनपा में 2000 करोड़ सड़क परियोजनाओं पर हंगामा, विपक्ष ने उठाए वित्तीय सवाल
Pune Municipal Corporation की स्थायी समिति बैठक में 2000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने वित्तीय क्षमता और नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे ड्रेन सफाई में देरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
Pune PMC Road Projects Controversy: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक इन दिनों भारी हंगामे और विवादों के केंद्र में है।
मुख्य विवाद करीब दो हजार करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी सड़क प्रोजेक्ट्स को लेकर है, जिन्हें प्रशासन ने ’72-ब’ और ’67-क’ नियमों के तहत मंजूरी के लिए पेश किया था।
विपक्षी दलों के नगरसेवकों ने पुणे मनपा की वित्तीय क्षमता पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन को घेरा है। उनका तर्क है कि जब महानगरपालिका फंड की कमी से जूझ रही है, तो इतनी भारी-भरकम राशि के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने का क्या औचित्य है?
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सदन गलत परंपरा शुरू न करे
विपक्ष का मुख्य विरोध विशेष रूप से चांदणी चौक से भूगांव सड़क के निर्माण और अन्य संबंधित प्रस्तावों को लेकर है। इन सड़कों के निर्माण का अनुमानित बजट 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत जगताप ने कड़ा ऐतराज जताते हुए पूछा कि क्या मनपा वास्तव में इतना बड़ा वित्तीय दायित्व उठाने की क्षमता रखती है?
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि सदन को गलत परंपराएं शुरू नहीं करनी चाहिए। नियमानुसार, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी स्वीकार करते समय उसकी कुल लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी की जा रही है।
प्रस्तावों का विस्तृत विवरण मांगा गया
- प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने यह भी जानना चाहा कि पिछले छह महीनों में ’72-ब’ और ’67-क’ के तहत कितने प्रस्तावों को चुपचाप मंजूरी दी गई है। नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासन बिना ठोस वित्तीय योजना के केवल घोषणाएं कर रहा है। 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था कहां से की जाएगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब फिलहाल प्रशासन के पास नहीं है।
- स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘गलत प्रथा’ करार दिया। उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर से पिछले छह महीनों में मंजूर किए गए सभी प्रस्तावों का विस्तृत विवरण मांगा है। विवाद के चलते चांदणी चौक से भूगांव रोड के प्रस्ताव पर चर्चा फिलहाल टाल दी गई है।
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बिना सदस्यता के भाषण पर विवाद
बैठक का एक और विवादित पहलू भाजपा नगरसेवक दिलीप वेडेपाटिल की उपस्थिति रही। वेडेपाटिल स्थायी समिति के आधिकारिक सदस्य नहीं हैं, फिर भी न केवल वे बैठक में मौजूद रहे, बल्कि उन्होंने भाषण भी दिया। नियमों के अनुसार, स्थायी समिति की बैठक में केवल उसके सदस्यों को ही बोलने की अनुमति होती है। इस घटना ने ‘आग में घी’ का काम किया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जमकर जुबानी जंग हुई। विपक्षी सदस्यों ने इसे नियमों का उल्लंघन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताया।
