Pune: 7 साल बाद भी लागू नहीं हो सकी ‘पे एंड पार्क’ योजना, ठेकेदारों की बेरुखी बनी बाधा
Pay And Park: पुणे की यातायात समस्या सुलझाने के लिए प्रस्तावित ‘पे एंड पार्क’ योजना को झटका लगा है। शहर के 6 व्यस्त इलाकों के लिए निकाले गए टेंडर को कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।
- Written By: अपूर्वा नायक
पे एंड पार्क (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से पुणे महानगरपालिका द्वारा प्रस्तावित ‘पे एंड पार्क’ योजना एक बार फिर अड़चनों में फंस गई है।
शहर के छह सबसे व्यस्त इलाकों में इस योजना को लागू करने के लिए निकाले गए टेंडर को कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया, जिससे मनपा को टेंडर जमा करने की समय सीमा बढ़ानी पड़ी है।
मनपा प्रशासन ने लक्ष्मी रोड, जंगली महाराज रोड, फर्ग्यूसन कॉलेज रोड, बालेवाडी हाई स्ट्रीट, विमाननगर और बिबवेवाड़ी मुख्य रोड जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों को ‘पे एंड पार्क’ योजना के लिए चुना था। इन क्षेत्रों में अनियंत्रित पार्किंग के कारण रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है।
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2018 में मिली थी पार्किंग नीति को मंजूरी
गौरतलब है कि पुणे की पार्किंग नीति को वर्ष 2018 में ही मंजूरी मिल चुकी थी। इसके करीब सात साल बाद इस नीति को जमीन पर उतारने की कोशिश की गई, लेकिन ठेकेदारों की उदासीनता के चलते योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है।
ठेकेदारों की बेरुखी बनी बड़ी चुनौती
सूत्रों के अनुसार, कम व्यावसायिक लाभ, सख्त शर्तें और संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों के कारण ठेकेदार इस योजना में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका सीधा असर शहर की यातायात सुधार योजनाओं पर पड़ रहा है।
ट्रैफिक सुधार की उम्मीदों को झटका
‘पे एंड पार्क’ योजना का उद्देश्य सड़कों पर अवैध पार्किंग को नियंत्रित करना और ट्रैफिक को सुचारू बनाना था। लेकिन बार-बार टेंडर को रिस्पॉन्स न मिलने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या मनपा को इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नए विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा।
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आगे क्या करेगी मनपा?
मनपा प्रशासन का कहना है कि ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए टेंडर की शर्तों की समीक्षा की जा सकती है। साथ ही, योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
