‘ड्रायजोन’ की पाबंदियों से परेशान किसान, वरुड में फैसले की समीक्षा की मांग
Vidarbha Water Management: अमरावती जिले की वरुड तहसील में पानी की स्थिति सुधरने के बावजूद ड्रायजोन की पाबंदियां जारी रहने से किसान और नागरिक परेशान हैं और अब इसे हटाने की मांग तेज हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
orange farmers Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Amravati News: कभी भीषण जलसंकट के कारण ‘ड्रायजोन’ घोषित किया गया वरुड तहसील अब पानी की बेहतर स्थिति के बावजूद उसी पुराने फैसले की मार झेल रहा है। जलसंधारण कार्यों और अच्छी बारिश के कारण भूजल स्तर सुधरने के बाद भी ड्रायजोन की पाबंदियां जारी हैं, जिससे किसान और आम नागरिक परेशान हैं। अब इस प्रतिबंध को हटाने की मांग तेज होती जा रही है।
जिले की वरुड तहसील को कई वर्ष पहले भूजल स्तर अत्यधिक नीचे जाने के कारण ड्रायजोन घोषित किया गया था। उस समय संतरे की फसल बचाने के लिए किसानों ने बड़ी संख्या में गहरे बोरवेल करवाए थे, जिससे जमीन के अंदर का पानी तेजी से कम हो गया था। इसी स्थिति को देखते हुए शासन ने नई बोरवेल और कुएं खोदने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
वरुड तहसील को ड्रायजोन से मुक्त करने की मांग तेज
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। जलसंधारण के व्यापक कार्य, तालाबों और छोटे बांधों का निर्माण तथा अच्छी वर्षा के कारण तहसील में पानी की उपलब्धता बढ़ी है। इसके अलावा आमिर खान की पहल पर पानी फाउंडेशन द्वारा भी क्षेत्र में कई जलसंधारण कार्य किए गए, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है।
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अब स्थिति यह है कि गर्मियों में भी पानी की टंचाई पहले जैसी नहीं दिखाई देती। इसके बावजूद ड्रायजोन की पाबंदियां जारी हैं, जिसके कारण किसानों और नागरिकों को नई बोरवेल या सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई लोगों को मजबूरी में महंगे दाम पर कुएं खुदवाने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शासन को इस फैसले की समीक्षा कर वरुड तहसील को ड्रायजोन से मुक्त करना चाहिए।
किसानों और नागरिकों की प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिक विलास टाकरखेडे ने कहा कि जब वरुड को ड्रायजोन घोषित किया गया था, उस समय की स्थिति गंभीर थी, लेकिन अब पानी की स्थिति बेहतर हो चुकी है। इसलिए तहसील को ड्रायजोन से मुक्त किया जाना चाहिए।
संतरा उत्पादक लोकेश अग्रवाल ने कहा कि ड्रायजोन की वजह से किसानों के खर्च में बेवजह बढ़ोतरी हो रही है और आम नागरिक भी परेशान हैं। सरकार को जल्द निर्णय लेकर वरुड तहसील को ड्रायजोन से मुक्त करना चाहिए।
संतरा उत्पादक किसान डॉ. प्रफुल्ल होले ने कहा कि अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही है। वर्तमान में वरुड तहसील में पर्यावरण और जलस्तर काफी संतुलित है। ऐसे में ड्रायजोन पर लगे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए, जिससे किसानों को राहत मिलेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।
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संतरा उत्पादक किसान गोपाल उर्फ सुभाष मालपे ने कहा कि जब वरुड को ड्रायजोन घोषित किया गया था, तब स्थिति अलग थी। अब तहसील में पानी का स्तर अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है और वर्षा भी औसत से अधिक हो रही है, इसलिए इसे ड्रायजोन से मुक्त किया जाना चाहिए।
संतरा उत्पादक किसान ओमप्रकाश उपाध्याय ने कहा कि ड्रायजोन के कारण किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और आम नागरिक भी परेशान हैं। सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
वरुड निवासी संतानु सोलव ने कहा कि तहसील को ड्रायजोन से मुक्त किया जाना बेहद जरूरी है। इससे किसानों को राहत मिलेगी। साथ ही सिंचाई के लिए किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि खेती का काम सुचारू रूप से हो सके।
क्षेत्रवासी अनिल गुल्हाने ने कहा कि यदि किसानों को बेहतर सिंचाई, बिजली और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो खेती को बचाया जा सकता है। इससे विदर्भ क्षेत्र भी समृद्ध और विकसित बन सकता है।
