पुणे मनपा में बड़ा घोटाला: कचरा प्रबंधन से गणवेश तक लापरवाही, 7 अधिकारियों पर जांच के आदेश
Solid Waste Department: पुणे मनपा में लाखों-करोड़ों की खरीदी गई सामग्री वर्षों तक उपयोग न होने से बेकार हो गई। मामले में 7 अधिकारियों पर विभागीय जांच शुरू, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Material Waste Scam: महानगरपालिका के भंडार विभाग द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन विभाग के लिए खरीदी गई सामग्री वर्षों तक बिना उपयोग पड़ी रहने का गंभीर मामला सामने आया है।
इस मामले में लापरवाही बरतने वाले सात अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार ठोस कचरा विभाग की मांग पर भंडार विभाग ने अगस्त 2023 में लगभग 50 लाख रुपए खर्च कर 20 हजार किलो सिटी वेस्ट ट्रीटमेंट पाउडर और 4 हजार लीटर लिक्विड बायो कैटेलिस्ट (इकोचिप) खरीदा था। लेकिन इनका उपयोग नहीं किया गया, जिसके चलते इनके रासायनिक गुण समाप्त हो गए और पूरा सामान बेकार हो गया।
75 लाख रुपये का गणवेश खरीदा था
इतना ही नहीं, वर्ष 2015 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए 75 लाख रुपये का गणवेश और 69.71 लाख रुपये की साड़ियां खरीदी गई थीं। इनका भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया, लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह सामग्री कर्मचारियों को वितरित ही नहीं की गई।
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यह सारा सामान वडगांव बुद्रुक स्थित सावित्रीबाई फुले अध्ययन केंद्र में पड़ा मिला। इस पूरे मामले को मनसे के प्रदेश महासचिव हेमंत संधुस ने नवंबर 2025 में उजागर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भंडार, ठोस कचरा और लेखा-वित्त विभाग ने केवल ठेकेदारों के बिल पास करने पर ध्यान दिया, जिससे मनपा को करीब 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
उन्होंने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और नुकसान की वसूली की मांग नगर आयुक्त नवल किशोर राम से की थी। इसके बाद मनपा आयुक्त ने अतिरिक्त आयुक्त ओमप्रकाश दिवटे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की।
नोटिस का सही तरीके से नहीं दिया जवाब
समिति की रिपोर्ट के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 8 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा था। जांच में सात अधिकारियों के जवाब असंतोषजनक पाए गए।
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इनमें तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता आशीष कोलगे, उप अभियंता नितिन शिंदे, कार्यकारी अभियंता मुकुंद बर्वे, उपायुक्त संदीप कदम, भंडार विभाग के तत्कालीन अधीक्षक चंद्रकांत वाघमारे, कार्यकारी अभियंता योगेश माली और तत्कालीन उपायुक्त गणेश सोनुने शामिल हैं।
