Pune News: पुणे के लोग किसे वोट देंगे? क्या बीजेपी का कमल खिलेगा या समय बदलेगा?
BJP Vs NCP Pune: पुणे नगर निगम चुनाव में नौ साल बाद हुए मतदान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है, जहां BJP और NCP के बीच कड़ी टक्कर के नतीजे शहर की सत्ता और राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
- Written By: आंचल लोखंडे
पुणे ड्रेन सफाई में देरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Election 2026 : पुणे में नौ साल बाद हो रहे म्युनिसिपल चुनाव के लिए बुधवार को मतदान हुआ। इस चुनाव में पुणे के मतदाता यह तय कर रहे हैं कि अगले पांच वर्षों तक शहर की बागडोर किसके हाथों में रहेगी। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बार फिर मौका मिलेगा या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP सत्ता में वापसी करेगी। इसलिए यह चुनाव सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
इस चुनाव में पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की कुल 165 सीटों के लिए मतदान हुआ। BJP, NCP (दोनों गुट), शिवसेना, कांग्रेस, शिवसेना ठाकरे गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच मुकाबला बेहद रोचक रहा। BJP ने सभी 165 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से दो उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। कुल मिलाकर 1,150 से अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे, लेकिन वास्तविक मुकाबला BJP और NCP के बीच ही माना जा रहा है।
BJP ने “125 सीटें जीतने” का दावा किया था
चुनावी प्रचार के दौरान BJP ने “125 सीटें जीतने” का दावा किया था। पार्टी ने मेट्रो परियोजना, ट्रैफिक जाम कम करने के लिए अंडरपास और शहर के विकास कार्यों को प्रमुख मुद्दा बनाया। वहीं, NCP ने आम पुणेकरों को सीधे राहत देने वाले ऐलानों पर जोर दिया, जिनमें मुफ्त PMP और मेट्रो बस सेवा तथा छोटे घरों के लिए इनकम टैक्स में छूट शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घोषणाओं ने चुनावी माहौल को काफी हद तक प्रभावित किया।
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अजित पवार ने लगभग अकेले ही चुनावी मोर्चा संभाला
कैंपेन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सार्वजनिक इंटरव्यू चर्चा में रहा, जबकि NCP की ओर से अजित पवार ने लगभग अकेले ही चुनावी मोर्चा संभाला। कांग्रेस और शिवसेना ठाकरे गुट ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी। कुल मिलाकर, पुणे नगर निगम चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता संतुलन की दिशा भी तय कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुणे की जनता किसे अपना समर्थन देती है।
