पुणे मनपा भर्ती घोटाले के बाद बड़ा फैसला, अब हर नियुक्ति पत्र पर होगा QR कोड
Pune Municipal Corporation Fake Job Letter: पुणे मनपा में फर्जी नियुक्ति पत्रों के जरिए बेरोजगार युवाओं से ठगी के मामले के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब हर नियुक्ति पत्र पर QR Code लगाया जाएगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Fake Job Letter News: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
फर्जी नियुक्ति पत्रों के जरिए युवाओं को जाल में फंसाने वाले इस बड़े भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद मनपा प्रशासन ने सख्त और तकनीकी कदम उठाने का फैसला किया है। अब 5 जून से पुणे मनपा की ओर से जारी होने वाले प्रत्येक आधिकारिक आदेश और नियुक्ति पत्र पर विशेष क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिससे दस्तावेजों की सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी।
मनपा प्रशासन के अनुसार, कोई भी नागरिक या उम्मीदवार अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर यह पता लगा सकेगा कि संबंधित नियुक्ति पत्र या प्रशासनिक आदेश असली है या नकली। प्रशासन का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्रों के जरिए युवाओं को ठगने वाले गिरोहों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
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आप पार्टी ने किया फर्जीवाडे का खुलासा
- इस कथित भर्ती घोटाले का खुलासा सबसे पहले आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा आयोजित पत्रकार परिषद में किया गया।
- मामले के सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। इसके बाद मनपा के अतिरिक्त आयुक्त प्रजित नायर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी।
- अतिरिक्त आयुक्त प्रजित नायर ने बताया कि पुणे ग्रामीण पुलिस ने हाल ही में मनपा प्रशासन से संपर्क कर कुछ संदिग्ध दस्तावेजों और अधिकारियों के संबंध में आधिकारिक जानकारी मांगी थी।
- पुलिस ने पूछा था कि क्या मंगेश खामकर नाम का कोई व्यक्ति मनपा में समाज कल्याण विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत है।
- साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई कि विक्रम कुमार कभी मनपा में अतिरिक्त आयुक्त रहे हैं या नहीं और दस्तावेजों में इस्तेमाल किए गए लेटरहेड असली है या फर्जी।
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मनपा के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं संदिग्ध
स्थापना विभाग द्वारा की गई जांच में सामने आया कि मंगेश खामकर नाम का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मनपा के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। इसके अलावा जिन सरकारी लेटरहेड, मुहरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल युवाओं को नियुक्ति पत्र देने के लिए किया गया था, वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। हालांकि विक्रम कुमार पूर्व में पुणे मनपा में आयुक्त पद पर कार्यरत रह चुके हैं, लेकिन आरोपियों ने उनके नाम और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर नकली दस्तावेज तैयार किए।
