पुणे की जीवनवाहिनी मुला-मुठा बनी ‘गटरगंगा’, शिरूर-दौंड-हवेली में प्रदूषण से खेती और स्वास्थ्य पर संकट
Pune और Pimpri Chinchwad के औद्योगिकीकरण से मुला-मुठा और भीमा नदियों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बिना ट्रीटमेंट सीवेज छोड़े जाने से खेती और नागरिकों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मुला नदी प्रदूषण (सौ. सोशल मीडिया )
Mula Mutha Bhima River Pollution: पुणे जिले के शिरूर, दौंड और हवेली तालुका जलसंपदा के लिए समृद्ध माने जाते हैं, क्योंकि यहां मुला, मुठा और भीमा नदियों का भरपूर पानी उपलब्ध रहता है।
लेकिन हाल के वर्षों में तेज शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण इन नदियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली मुला-मुठा नदी अब गंभीर प्रदूषण की मार झेल रही है।
बिना ट्रीटमेंट कचरे से बिगड़ी स्थिति
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका क्षेत्रों में बढ़ती आबादी, झोपड़पट्टियों और उद्योगों से निकलने वाला सीवेज, प्लास्टिक और रासायनिक कचरा बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते नदी का पानी अत्यधिक दूषित हो गया है और कई स्थानों पर यह गटर जैसा दिखाई देने लगा है।
सम्बंधित ख़बरें
Denim Fashion: केवल परफेक्ट फिट ही नहीं, आज की मॉडर्न इंडियन महिलाएं जींस में चाहती हैं ये 8 खास बातें
14 हजार युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, 9 हजार को रोजगार-स्वरोजगार का अवसर
पुणेवासियों के लिए राहत: टेमघर बांध में जल स्तर 50% पहुंचा, एक महीने की पानी की आपूर्ति हुई सुरक्षित
बाल कैंसर मरीजों के लिए सरकार की नई पहल, महंगी जांच का खर्च अब सरकार उठाएगी; 200 बच्चों को लाभ
उजनी डैम तक पहुंच रहा प्रदूषित पानी
रांजणगांव सांडस के पास मुला-मुठा और भीमा नदियों का संगम होता है, जहां से यह प्रदूषित पानी उजनी डैम की ओर बढ़ता है। दौंड क्षेत्र के पारगांव सहित कई इलाकों में कोल्हापुर पद्धति के डैमों से लाखों एकड़ भूमि सिंचित होती है, लेकिन अब डैमों के पास पानी की सतह पर तेल और रसायनों की परत जमने लगी है।
जलचर और खेती पर गंभीर असर
नदियों में जमा गंदगी से जलचरों का जीवन संकट में पड़ गया है। दूषित पानी से खेती की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। साथ ही नदी किनारे बसे गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
ये भी पढ़ें :- Mumbai-Pune Expressway पर खतरे वाले ब्लैक स्पॉट चिन्हित, पत्थर गिरने से बचाव के लिए शुरू हुआ बड़ा काम
सुधारात्मक कदमों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह प्रदूषण संकट जल, कृषि और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। नदियों की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट और औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण जैसे उपाय जल्द लागू करना जरूरी बताया जा रहा है।
