कलाकार कट्टा (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Kalakar Katta Controversy News: डेक्कन जिमखाना के प्रतिष्ठित ‘कलाकार कट्टा’ को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी ने उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें इस सांस्कृतिक केंद्र को यातायात और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया था।
दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 3-4 वर्षों में डेक्कन पुलिस या यातायात विभाग के पास इस कट्टे के कारण ट्रैफिक जाम या सुरक्षा संबंधी एक भी आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
विवाद की जड़ भाजपा के स्थानीय नगरसेवकों द्वारा महानगर पालिका आयुक्त को लिखा गया वह पत्र है, जिसमें कट्टे को वहां से हटाने की मांग की गई थी। भाजपा नेताओं का तर्क था कि कलाकारों के प्रदर्शन और जमा होने वाली भीड़ के कारण एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को निकलने में परेशानी होती है।
साथ ही, फुटपाथ चौड़ीकरण को बसों की आवाजाही में बाधक बताया गया था। हालांकि, आरटीआई के आंकड़े इन दावों को पूरी तरह खारिज करते नजर आ रहे हैं। आमने-सामने आए महायुति के घटक दल इस मुद्दे पर महायुति के साथी दल ही आपस में भिड़ गए हैं।
प्रदेशाध्यक्ष बाबासाहेब पाटील ने कहा कि जब पुलिस रिकॉर्ड में कोई शिकायत ही नहीं है, तो इसे हटाने की मांग केवल राजनीति से प्रेरित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ‘मन की बात’ में इस कट्टे की सराहना कर चुके हैं, ऐसे में इसे बद करना पुणे की संस्कृति का अपमान है।
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दूसरी ओर, डेक्कन जिमखाना कॉलोनी के अध्यक्ष किशोर गोडबोले का कहना है कि उनका विरोध कला से नहीं, बल्कि जमीन के उपयोग को लेकर है, उनके अनुसार, जमीन जिस उद्देश्य के लिए आवंटित थी, उसका उल्लंघन हो रहा है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में महायुति के घटक दलों के बीच अब श्रेयवाद की लड़ाई भी तेज हो गई है। जहां एक और भाजपा नगरसेवक इसे जनहित और सुरक्षा का मुद्दा बता रहे है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस ने इसके समर्थन में आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।