पुणे में निजी-PPP अस्पतालों पर धोखाधड़ी के आरोप, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा
Pune Hospital Fraud: पुणे में निजी और PPP मॉडल अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे महात्मा फुले और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं दे रहे। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे न्यूज (सौ. फाइल फोटो )
Pune Hospital Fraud PPP Model Issue: शहर में निजी और पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित अस्पतालों में नागरिकों के साथ बड़े स्तर पर धोखाधड़ी होने का गंभीर आरोप नगरसेवकों ने लगाया है।
सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाएं लागू होने के बावजूद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नगरसेवक अमोल बालवडकर ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि बाणेर स्थित पुणे महानगर पालिका की करोड़ों की इमारत में चल रहे एक अस्पताल को मात्र 500 रुपये के नोटरी स्टाम्प पर संचालन हेतु दे दिया गया है।
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सरकारी संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग
लगभग 40 करोड़ रुपये मूल्य की इस सरकारी संपत्ति व्यावसायिक उपयोग तो हो रहा है, लेकिन आम नागरिकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। बालवडकर ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर किस नियम के तहत यह संपत्ति ‘जेपी फाउंडेशन’ को सौंपी गई?
इसी बीच एक अत्यंत संवेदनशील मामला भी सदन के पटल पर रखा गया। एक नवजात बच्ची पिछले एक महीने से एनआईसीयू में भर्ती है। बच्ची के परिजन महानगर पालिका के कर्मचारी हैं, इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने महात्मा फुले योजना के दस्तावेज स्वीकार करने से मना कर दिया और पूरा बिल भरने का दबाव बनाया। परिजनों का आरोप है कि भुगतान न होने तक अस्पताल ने बच्ची को डिस्चार्ज देने से भी इनकार कर दिया, जिस पर नगरसेवकों ने कड़ी नाराजगी जताई।
योजना के कार्ड स्वीकार नहीं करता अस्पताल प्रशासन
नगरसेवक अजय खेडेकर ने कहा कि शहर के कई अस्पतालों में शहरी गरीब योजना, महात्मा फुले योजना और आयुष्मान भारत योजना के कार्ड स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को दर-दर भटकना पडता है।
उन्होंने मांग की कि सभी अस्पतालों को इन योजनाओं का लाभ देना अनिवार्य किया जाए, मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर मंजूषा नागपुरे ने स्वास्थ्य और भवन विभाग को इस प्रकरण की गहन जांच करने तथा अगली सभा में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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बेड के लिए ऐप शुरू करें
नगरसेवकों ने सुझाव दिया कि मनपा, पीपीपी और धर्मादाय अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए आरक्षित बेड की स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक मोबाइल ऐप विकसित किया जाना चाहिए। इस ऐप के माध्यम से अस्पताल का नाम, कुल आरक्षित बेड, उपलब्ध बेड और वर्तमान में भर्ती मरीजों की वास्तविक जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
