Pune Municipal में हंगामा: 3 करोड़ के टेंडर को लेकर भिड़ीं BJP नेता, ‘कमीशन’ और श्रेय की लड़ाई उजागर

Pune Municipal Corporation भवन में दो भाजपा महिला पार्षदों के बीच तीखी बहस और झड़प का मामला सामने आया है। 3 करोड़ के टेंडर और कथित कमीशन विवाद ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
Pune Local Body Election Candidates Disqualified
पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Pune Municipal Corporation Tender Dispute: पुणे महानगर पालिका मुख्यालय एक बार फिर विवादों का केंद्र बन गया है। बुधवार को मनपा भवन के भीतर भारतीय जनता पार्टी की एक वर्तमान नगरसेविका और एक पूर्व नगरसेविका के बीच सार्वजनिक रूप से तीखी बहस, गाली-गलौज और खींचतान की शर्मनाक घटना हुई।

इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने पुणे मनपा के भीतर होने वाले विकास कार्यों में कथित 'कमीशन' (टक्केवारी) और राजनीतिक श्रेय लेने की जंग को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह पूरा विवाद बाणेर इलाके में निर्माणाधीन आदिवासी छात्राओं के आवासीय शिक्षा केंद्र के काम को लेकर हुआ।

Pune Municipal Corporation में 3 करोड़ के टेंडर पर बवाल

मिली जानकारी के अनुसार, Pune Municipal Corporation द्वारा बाणेर में आदिवासी छात्राओं के लिए एक महत्वाकांक्षी आवासीय शिक्षा केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कार्य हो चुका है। शेष बचे कार्यों के लिए हाल ही में 3 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था, जिसे स्थायी समिति ने अपनी मंजूरी भी दे दी है। भाजपा की पूर्व नगरसेविका राजश्री काले इस परियोजना के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही थीं और इसका श्रेय उन्हें जाता रहा है। बुधवार को जब राजश्री काले, वर्तमान भाजपा नगरसेविका रोहिणी चिमटे और संबंधित परियोजना के ठेकेदार मनपा के भवन विभाग में मौजूद थे, तभी किसी बात को लेकर दोनों महिला नेताओं के बीच विवाद शुरू हो गया।

रोहिणी चिमटे पर काम रुकवाने के प्रयास का आरोप

देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच तीखी गाली-गलौज होने लगी। राजश्री काले ने आरोप लगाया कि चूंकि परियोजना अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही आदिवासी छात्राओं को इसका लाभ मिलने वाला है, इसलिए रोहिणी चिमटे इसमें अड़चनें पैदा कर रही हैं। काले का दावा है कि चिमटे ने टेंडर प्रक्रिया में 'कमीशन' के मुद्दे को लेकर ठेकेदार को काम शुरू न करने की चेतावनी दी और खुद को स्थायी समिति का सदस्य बताते हुए परियोजना रुकवाने की धमकी दी।

दूसरी ओर, रोहिणी चिमटे ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, उनका कहना है कि परियोजना के परिसर की बाउंड्री वॉल (सीमा दीवार) का काम अब भी अधूरा है, जिसकी वजह से आसपास रहने वाले नागरिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

चिमटे के अनुसार, उन्होंने केवल यह मांग रखी थी कि पहले अधूरे बाउंड्री वॉल के काम को प्राथमिकता दी जाए। इस विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मनपा भवन विभाग के कार्यकारी अभियंता बिपिन शिंदे ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि परियोजना के टेंडर को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है और शेष बचे कार्यों को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com