उरुली-फुरसुंगी ने दी चेतावनी, कचरा डिपो बंद करने से पुणे में संकट गहराने के आसार
Pune Garbage Crisis News: उरुली देवाची-फुरसुंगी नगर परिषद ने PMC के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कचरा डिपो बंद करने की चेतावनी दी है। पानी आपूर्ति और विकास निधि की मांग पूरी न होने से विवाद बढ़ गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे कचरा संकट उरुली फुरसुंगी विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Garbage Crisis Uruli Fursungi: पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) और उरुली देवाची-फुरसुंगी नगर परिषद के बीच विवाद एक बार फिर गहरा गया है।
विकास कार्यों के लिए मांगी गई निधि और जलापूर्ति की मांगों पर महानगरपालिका द्वारा कोई प्रतिक्रिया न दिए जाने से नाराज नगर परिषद ने अब ‘कचरा डिपो बंद’ करने का कड़ा फैसला लिया है।
नगर परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनके अधिकार क्षेत्र में चल रही मौजूदा कचरा परियोजनाओं को तत्काल बंद किया जाए और भविष्य में किसी भी नई परियोजना की अनुमति नहीं दी जाएगी। उरुली देवाची-फुरसुंगी नगर परिषद के अध्यक्ष संतोष सरोदे और उपाध्यक्ष ओंकार कामठे ने इस संबंध में मनपा आयुक्त को एक औपचारिक निवेदन सौंपा है।
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नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा
नगर परिषद का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से महानगरपालिका द्वारा उरुली देवाची में डाले जा रहे कचरे के कारण स्थानीय जल स्त्रोत पूरी तरह दूषित हो चुके हैं, भूजल के जहरीले होने से नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इसी के मद्देनजर, नगर परिषद ने मांग की है कि पुणे महानगरपालिका पूर्व की भांति दोनों क्षेत्रों को प्रतिदिन 180 टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे। नगर परिषद ने अपनी मांगों में यह भी स्पष्ट किया है कि क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए मनपा को प्रतिवर्ष 40 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान करना चाहिए, लंबे समय से इन गांवों ने पुणे शहर का कचरा झेला है, जिसके बदले में बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद की जा रही थी।
लेकिन मनपा प्रशासन द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। मनपा को दिए गए ज्ञापन में पदाधिकारियों ने याद दिलाया है कि प्रशासन ने पूर्व में कचरा डिपो को पूरी तरह बंद करने का आश्वासन दिया था। नगर परिषद ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो कचरा परियोजनाओं के संचालन को बलपूर्वक रोक दिया जाएगा।
शहर में चरमरा जाएगी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था
उरुली देवाची और फुरसुंगी के इस कड़े रुख ने महानगरपालिका के सामने कचरा प्रबंधन का एक नया संकट पैदा कर दिया है। यदि उरुली देवाची-फुरसुंगी में कचरा परियोजनाएं बंद होती हैं, तो पुणे शहर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
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यह दबावतंत्र महानगरपालिका प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयुक्त और महानगरपालिका प्रशासन इस तनातनी को सुलझाने के लिए नगर परिषद की मांगों को स्वीकार करते हैं या फिर पुणे शहर को एक बार फिर कचरे के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।
