PCMC Financial Crisis: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा पर 527 करोड़ का संकट, ठेकेदार विवादों से बढ़ा वित्तीय बोझ
PCMC Financial Crisis News: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा की अधूरी परियोजनाएं और ठेकेदार विवाद अब भारी पड़ रहे हैं। 2 आर्बिट्रेशन मामलों में फैसले मनपा के खिलाफ गए तो 527 करोड़ रुपये से अधिक का बोझ बढ़ सकता है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका भवन फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
PCMC Financial Crisis Arbitration: पिंपरी-चिंचवड़ नगरपालिका द्वारा शुरू की गई कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूर्ण न होने और ठेकेदारों के साथ बढ़ते विवादों के कारण मनपा की वित्तीय स्थिति पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
दो पृथक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) मामलों में ठेकेदारों के पक्ष में आए संभावित निर्णयों के कारण मनपा पर लगभग 527 करोड़ 48 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने की आशंका है। पहले से ही भारी देनदारियों का सामना कर रही महापालिका के लिए यह नई स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो रही है।
शहर के प्रमुख बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रोजेक्ट्स में उत्पन्न बाधाओं, जन-आंदोलनों और तकनीकी विवादों के कारण कई कार्य वर्षों तक लंबित रहे। इसके परिणामस्वरूप संबंधित ठेकेदारों ने कानूनी मध्यस्थता का मार्ग अपनाया, जहां अब मनपा को भारी हर्जाना भुगतना पड़ सकता है।
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पवना पाइपलाइन परियोजना
यह परियोजना पिंपरी-चिंचवड़ मनपा का सबसे बड़ा वित्तीय विवाद है। इस परियोजना को स्थानीय किसानों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा था। 9 अगस्त 2011 को आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद यह कार्य पूरी तरह ठप हो गया था।
हालांकि, राज्य सरकार ने 8 सितंबर 2023 को इस परियोजना पर लगी रोक हटा दी, लेकिन दीर्घकाल तक कार्य बंद रहने और अनुबंध रद्द होने के कारण ठेकेदार ने निगम के विरुद्ध दावा ठोक दिया।
- नाशिक फाटा डबल डेकर फ्लाईओवर
- दूसरा प्रकरण नाशिक फाटा स्थित द्वि-स्तरीय फ्लायओवर से संबंधित है, जिसका निर्माण पुणे-मुंबई पुराने राजमार्ग पर यातायात के दबाव को कम करने हेतु किया गया था।
- मूल लागत 93 करोड़ रुपये
- ठेकेदार की मांग 30.76 करोड़ रुपये
- 6 नवंबर 2024 के निर्णय अनुसार देय राशि लगभग 31 करोड़ रुपये
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कानूनी विवाद भी बन रहे वजह
- हाल ही में, मनपा ने विभिन्न विकास कार्यों हेतु म्युनिसिपल बॉन्ड और ग्रीन बॉन्ड के माध्यम माध्यम से 400 करोड़ रुपये का ऋण लिया है, है, जिसकी सूचना मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई है।
- बीएसई के नियमों के अनुसार, मनपा को अपनी सभी वर्तमान और संभावित देनदारियों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य है, जिसके कारण ये आर्विटेशन मामले प्रकाश में आए है। परियोजनाओं में विलंब, ठेकेदारों के परिवर्तन और बढ़ते कानूनी विवादों के कारण विकास कार्यों की लागत निरंतर बढ़ती जा रही है।
- मनपा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका सीधा प्रभाव न केवल शहर के विकास कार्यों की गति पर पड़ेगा।
