'चाचा' को भरोसा दिलाना पड़ता है। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
पुणे: बोरकरवाड़ी में एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अचानक अपने चाचा का नाम लिया। उन्होंने बयान दिया कि चाचा को विश्वास में लिए बिना वे आगे नहीं बढ़ सकते और एक बार फिर बारामती में अजित पवार के बयान की चर्चा हुई।
शनिवार को ही उपमुख्यमंत्री अजित पवार और वरिष्ठ नेता व रयत शिक्षण संस्था के अध्यक्ष खा. शरद पवार एक ही मंच पर एक साथ बैठे नजर आए। यह घटना अभी ताजा ही थी कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के इस बयान ने कि चाचा को विश्वास में लेना पड़ता है, यह बयान दिया तो लोग इसमें राजनीतिक संकेत ढूंढने लगे हैं।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के सीईओ एस. आर. जनाई योजना से बंद नहर के माध्यम से बोरकरवाड़ी झील में पानी छोड़ा गया। इसका उद्घाटन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को बोरकरवाड़ी में किया। वे इस अवसर पर आयोजित जल पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे।
कई श्रमिकों ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ज्ञापन सौंपा था। इस कथन का जिक्र करते हुए उन्होंने सामने बैठे ‘चाचा’ कुतवाल की तरफ देखा और कहा, ‘‘मैंने एक सड़क के काम के बारे में आपसे बात की है, मैंने अधिकारियों से बात की है, मैंने उनसे कहा है, चाचा को विश्वास में लीजिए…’’ इतना कहने के बाद अजित पवार कुछ क्षण रुके और फिर बोले… अरे, चाचा को विश्वास में लिए बिना कोई काम आगे नहीं बढ़ सकता, बाबा..! और श्रोतागण उनके वक्तव्य पर हंसने लगे और तालियां बजाने लगे।
आगे क्या चर्चा होगी, यह सोचकर अजित पवार ने कहा, “मैं काका कुतवाल की बात कर रहा हूं, नहीं तो आप तुरंत कहेंगे कि दादा फिसल गए हैं, लेकिन दादा नहीं फिसले हैं,” और सभी ने हंसते हुए पवार की बात का स्वागत किया।
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वरिष्ठ नेता शरद पवार उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे जय पवार की सगाई में शामिल हुए। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और शरद पवार भी सतारा के रयात शिक्षा संस्थान में एक कार्यक्रम में एक दूसरे के बगल में बैठे थे। अजित पवार ने पहले कहा था कि हम अपने चाचा के आशीर्वाद से अच्छा कर रहे हैं। पवार के बार-बार दिए गए बयानों से राज्य की राजनीति में गरमागरम बहस छिड़ गई है।